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Oct 16, 2023

October 16, 2023

माँ ब्रह्मचारिणी साधना से जागृत होती कुंडलिनी शक्ति, शीघ्र विवाह के लिए जाने उपाय- ज्योतिष गुरू पंडित अतुल शास्त्री

  


 नवरात्र के दूसरे दिन मां के भक्तों द्वारा मां ब्रह्मचारिणी का विधिवत पूजा अर्चन किया गया। सुबह से ही देवी मंदिरों में भक्तों का ताता लगा रहा शहर स्थित ऐतिहासिक मां काली मंदिर पर भक्तों ने पूजा अर्चन किया।

नवरात्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री ने बताया की नवरात्रि में शिव-पार्वती का एक चित्र अपने पूजास्थल में रखें और उनकी पूजा-अर्चना करने के पश्चात मंत्र का 3, 5 या 10 माला जाप करें. जाप के बाद भगवान शिव से विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें-


मंत्र- ऊं शं शंकराय सकल-जन्मार्जित- पाप-विध्वंसनाय,

पुरुषार्थ-चतुष्टय- लाभाय च पतिं मे देहि कुरु कुरु स्वाहा।।

माँ ब्रह्मचारिणी

ब्रह्मा का अर्थ है "तप" तथा "ब्रह्मा" शब्द उनके लिए लिया जाता है। जो कठोर भक्ति करते है। अपने दिमाग और दिल को संतुलन में रखकर भगवान को खुश करते है। इसी कारण वश माँ दुर्गा के दुसरे स्वरूप का नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। ब्रह्म का अर्थ तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। माँ दुर्गा का यह शांति पूर्ण स्वरूप है। शास्त्रों में वर्णित माँ ब्रह्मचारिणी पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यन्त भव्य है। मां के दाहिने हाथ में जप की माला है और बायें हाथ में कमण्डल है। वह पूर्ण उत्साह से भरी हुई हैं।

नवरात्र पर्व के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। भारतीय संस्‍कृति की हिन्‍दु मान्‍यता के अनुसार मां दुर्गा का ब्रह्मचारिणी स्वरूप हिमालय और मैना की पुत्री हैं, जिन्‍होंने भगवान नारद के कहने पर भगवान शंकर की ऐसी कठिन तपस्‍या की, जिससे खुश होकर ब्रम्‍हाजी ने इन्‍हे मनोवांछित वरदान दिया जिसके प्रभाव से यह भगवान शिव की पत्‍नी बनीं। विस्तृत रूप से उनकी यह कहानी इस प्रकार है। पार्वती हिमवान की बेटी थी। एक दिन वह अपने दोस्तों के साथ खेल में व्यस्त थी नारद मुनि उनके पास आये और भविष्यवाणी की "तुम्हरी शादी एक नग्न भयानक भोलेनाथ से होगी और उन्होंने उसे सती की कहानी भी सुनाई। नारद मुनि ने उनसे यह भी कहा उन्हें भोलेनाथ के लिए कठोर तपस्या भी करनी पढ़ेगी। इसीलिए माँ पार्वती ने अपनी माँ मेनका से कहा की वह शम्भू (भोलेनाथ ) से ही शादी करेगी नहीं तोह वह अविवाहित रहेगी। यह बोलकर वह जंगल में तपस्या निरीक्षण करने के लिए चली गयी। इसीलिए उन्हें तपचारिणी ब्रह्मचारिणी कहा जाता है।


मां ब्रह्मचारिणी मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी और पंचामृत का भेग लगाया जाता है। इन चीजों का दान करने से लंबी आयु का सौभाग्य मिलता है। मां ब्रम्हचारिणी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। अत: नवरात्र‍ि के दूसरे दिन पीले रंग के वस्त्रादि का प्रयोग कर माँ की आराधना करना शुभ होता है। मान्‍यता है कि माता ब्रह्मचारिणी की पूजा और साधना करने से कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है। यदि आप भी अपनी कुंडलिनी शक्ति जाग्रत करना चाहते हैं। और उन्हें प्रसन्न करना चाहते हैं। तो इस नवरात्रि में निम्नलिखित मन्त्रों का जाप करें.


या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तसयै, नमस्तसयै,नमस्तसयै नमो नम:

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥


ज्योतिष गुरू पंडित अतुल शास्त्री

09594318403/9820819501

Oct 15, 2023

October 15, 2023

कोठवल कलां में लगातार 7 साल से सजता है मां दुर्गा का दरबार

 कोठवल कलां में लगातार 7 साल से  सजता है मां दुर्गा का दरबार  

                                                                                          फखरपुर/बहराइच - थाना फखरपुर क्षेत्र के अन्तर्गत ग्राम पंचायत कोठवल कलां में विगत 7 साल से जगत जननी मां जगदम्बा का दरबार लगता है। जिसमें क्षेत्र के तमाम संभ्रांत जन और ग्रामीणों की विशेष सहभागिता रहती है। उक्त जानकारी देते हुए गांव के कोटेदार विश्व नाथ सिंह,समिति अध्य्क्ष चंद्र प्रकाश सिंह(भाजपा महामंत्री)ने बताया कि गांव में स्थित शत चंडी यज्ञ शाला पर शारदीय नवरात्रि के अवसर पर बीते 7 साल से लगातार मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर नौ दिनों तक पूजा और आराधना का क्रम चलता है और उसके बाद विशाल भंडारे के साथ मूर्ति विसर्जन किया जाता है। आज रविवार को नवरात्रि के पहले दिन मां भगवती की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना का क्रम शुरू हो गया है। इस दौरान सूर्यभान सिंह, विश्वनाथ सिंह,चंद्र प्रकाश सिंह,पिंटू शाहू, मल्लन , रामउग्र सिंह, संदीप सिंह,विपिन,रवि,किशन,राजन,मुन्ना सिंह ,शिवम,अशोक सिंह,राहुल सिंह,अंकुर सिंह,रविंदर सिंह ,विकास ,प्रदीप,देशराज,पुत्तन, छांगुर सिंह,अनूप सिंह,रेखा सिंह,कंचन सिंह, गुडाना सिंह, बृजकुवर, लज्जावती,कांति देवी,के साथ ही अन्य तमाम देवी भक्त मौजूद रहे।

October 15, 2023

परसपुर : कलश एवं मूर्ति स्थापना के साथ शुरू हुआ दुर्गा पूजा महोत्सव , नवरात्रि के पहले दिन की गई शैलपुत्री की पूजा आराधना




परसपुर / गोंडा : परसपुर थाना क्षेत्र के कई स्थलों पर बड़े ही धूमधाम एवं हर्षोल्लास पूर्वक नवरात्रि पर्व के अवसर पर दुर्गा पूजा महोत्सव आयोजित किया गया है इस बार शारदीय नवरात्र 15 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक रहेगी जिसमें 9 दिनों तक मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है इस बार शारदीय नवरात्रि पूरे 9 दिनों तक रहेगा नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करते हुए मां के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा आराधना की गई परसपुर कस्बा के आदर्श नगर , कटरा भवानी मंदिर , आटा , मौर्य नगर , मोहना चरहुंआ, लोहंगपुर (रामहेतपुरवा), त्यौरासी,मलांव,प्योली(दक्षिण पुरवा) समेत विभिन्न गांव में प्रतिमा स्थापित की गई है पंडाल को रंग-बिरंगे झालरों से सजाया गया है । जय माता दी के नारों से वातावरण गुंजायमान रहा।

हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 15 अक्टूबर से नवरात्रि प्रारंभ हुआ है । पंडित नागेश्वरनाथ शुक्ला ने बताया कि शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 23 अक्टूबर 9 दिनों तक मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की परंपरा है नवरात्रि के पहले दिन रविवार को शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करते हुए मां के पहले स्वरूप शैलपुत्री की आराधना की गई।

October 15, 2023

शक्ति” चतुर्थ चरण अन्तर्गत नारी सशक्तिकरण अभियान के क्रम में जनपद के विभिन्न थानों द्वारा महिलाओं/बालिकाओं को किया गया जागरूक

 शक्ति” चतुर्थ चरण अन्तर्गत नारी सशक्तिकरण अभियान के क्रम में जनपद के विभिन्न थानों द्वारा महिलाओं/बालिकाओं को किया गया जागरुक 


बहराइच --आज दिनांकः15.10.2023 को पुलिस अधीक्षक  प्रशांत वर्मा के कुशल निर्देशन में“मिशन शक्ति” चतुर्थ चरण नारी सशक्तिकरण अभियान के अन्तर्गत समाज में नारी सुरक्षा व सम्मान एवं नारी स्वावलंबन हेतु जनपद के थानों द्वारा अपने-अपने थाना में नियुक्त महिला पुलिसकर्मी (शक्ति दीदी) द्वारा क्षेत्र में गांवों में चौपाल व नवरात्रि के शुभ अवसर पर दुर्गा पंडालों में जाकर महिलाओं/बालिकाओं को 1090-वीमेन पॅावर लाइन, 181-महिला हेल्प लाइन, 108-एम्बुलेंस सेवा, 1076–मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, 112-पुलिस आपातकालीन सेवा, 1098-चाइल्ड लाइऩ, 102-स्वास्थ्य सेवा तथा थानों पर स्थापित महिला हेल्प डेस्क के बारे में विस्तृत जानकारी के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण से संबंधित उ0प्र0 शासन की विभिन्न योजनाओं व प्राथमिकताओ के सम्बन्ध में जानकारी देकर जागरूकता संबंधी पंपलेट वितरित किया गया ।


Oct 17, 2020

October 17, 2020

नवरात्रि के पहले दिन सजा उत्तरी भवानी का दरबार,भक्तों ने दर्शन कर माँगी मन्नतें। देखें श्रंगार व दिव्य आरती।

 गोण्डा - 

शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन माँ उत्तरी भवानी बाराही देबी का दरबार बड़े ही आकर्षक ढंग से सजाया गया तथा मन्दिर के पुजारी द्वारा माता बाराही देबी की पूजा आराधना की गई। इस दौरान कोरोना संकट के चलते बहुत भीड़ नहीं इक्कट्ठा हो पाई फिर भी स्थानीय लोगो के साथ अन्य तमाम देबी भक्तो ने मन्दिर पहुंचकर माता भगवती का दर्शन कर मन्नत माँगी। 

कोविड 19 महामारी का असर धार्मिक पर्वों पर भी देखने को मिल रहा है, विगत वासन्तिक नवरात्रि में तो देबी मन्दिरों के कपाट भी नहीं खोले जा सके थे। लेकिन शारदीय नवरात्रि के मौके पर प्रशासन द्वारा कोरोना प्रोटोकाल के तहत मठ मन्दिरों को खोलने की अनुमति दे दी है। इस दौरान शनिवार को पहले नवरात्रि के दिन बाराही देबी मन्दिर में भक्तों ने पहुँचकर मत्था टेका और दर्शन कर अपनी मनोकामना पूर्ति हेतु विनती की। लेकिन प्रसाद न चढ़ा पाने की कसक लोगो के दिलों में बनी रही।



नवरात्रि के पहले दिन सजा उत्तरी भवानी का दरबार,भक्तों ने दर्शन कर माँगी मन्नतें। देखें श्रंगार व दिव्य आरती।


Mar 25, 2020

March 25, 2020

आप सब माँ वाराही देवी की आरती का सजीव दर्शन करें और मातारानी से विश्व कल्याण की विनती करें जय माँ उत्तरी भवानी।


माँ वाराही न्यूज ग्रुप की ओर से आप सभी को वासन्तिक नवरात्रि की हार्दिक बधाई व अनन्त शुभकामनाएं।आओ हम सब मिलकर जगत कल्याण हेतु अवतरी जगतजननी माँ भगवती शक्ति स्वरूपा सर्व विघ्न नाशक उत्तरी भवानी माँ वाराही देवी के दिव्य स्वरूप व उनकी प्रथम नवरात्रि की ब्रम्हबेला में हुई अलौकिक आरती का दर्शन करें और विश्व मे फैली महामारी से छुटकारा पाने व जगत कल्याण की प्रार्थना करें। माँ समस्त विश्व का कल्याण करें। जय मातादी।

Nov 8, 2019

November 08, 2019

नारी के सम्मान का प्रतीक व आध्यात्मिक पर्व है-देवोत्थानी एकादशी, जानें महत्व।

देवोत्थानी एकादशी, जानें महत्व (Devothani Ekadasi)


कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थानी तथा प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है, इन दोनों शब्दों से स्वतःही स्पष्ट हो जाता है कि, किसी भी व्यक्ति के खुद के हाथ में है कि वह अपने ह्रदय के 'देवत्व' को जागृत कर सकता है। क्योंकि प्रबोधन शब्द का अर्थ ही जागना, यथार्थ ज्ञान और पूर्ण बोध होने से है, जीवन में हरक्षण ज्ञान हासिल किया जा सकता है क्योंकि ,ज्ञान अनन्त है, ज्ञान को ही  भगवान माना गया है। जीवन के बारे में ज्ञान होते ही काम, क्रोध, मद, लोभ, ईर्ष्या-द्वेष आदि अंधकार से मुक्ति मिलती जाती है, और जीवन भगवान विष्णु के वैकुंठ या सत्यलोक जैसा आह्लादकारी व आनंदमय हो जाता है ।

जानें तुलसी विवाह की परम्परा व महत्व। ( Tulsi Vivah )

नारी के सम्मान का प्रतीक व आध्यात्मिक पर्व है-देवोत्थानी एकादशी, जानें महत्व। tulsi vivah

इसी दिन तुलसी से भगवान विष्णु ( God Vishnu ) का विवाह होता है । इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड ( Universe ) में भगवान सूर्य ( Sun ) को विष्णु का ही रूप माना गया है। श्रीमद्भगवत गीता ( Shrimadbhagwat Geeta )में नारायण अवतार कृष्ण ( Krishan )ने कहा है कि,मैं ही सूर्य हूँ । हम सभी जानते हैं कि,समस्त ब्रह्मांड को सूर्य की किरणों से ऊर्जा मिलती है, आयुर्वेद के अनुसार तुलसी के पौधे से भी सदैव ऊर्जा-तरंगें (Energy Waves ) निकलती रहती हैं,तुलसी के पेड़ की परिधि के दो सौ मीटर तक जीवनदायिनी ऊर्जा तरंगें निकलती है । आध्यात्मिक ग्रन्थों ( Spiritual Texts or Aadhyatmik Granth ) में कहा गया है कि, जहां तुलसी के पेड़ लगे होते हैं,वहाँ पर आकाशीय बिजली कदापि नहीं गिरती है,वह परावर्तित हो जाती हैं,इस तरह सूर्य की किरणों तथा धरती पर स्थित किरणों में आपसी सामंजस्य विवाह-बंधन जैसा है माना गया है।

विकृत विवाह प्रथा को सुव्यवस्थित करने की तिथि है एकादसी।


प्राचीन काल मे विवाह का स्वरूप बहुत ही विकृत हुआ करता था,ताकत के बल पर किसी नारी को बलपूर्वक अपनी पत्नी बना लेने की कुप्रथा व्याप्त थी, पुराणों में जलन्धर, शंखासुर, शंखचूड़ नामक दैत्यों की कथा है कि, इन सभी राक्षसी प्रवित्ति के लोगो ने तुलसी को बलपूर्वक पत्नी बना लिया था, उस समय में पत्नी का कर्तव्य होता था कि, वह मात्र एक पति के प्रति पूर्ण समर्पित रहे,तुलसी के पूर्व पति का नाम जलन्धर था,वृन्दा के सतीत्व से जलन्धर महाबली हो गया था,बल की प्रवृत्ति ऐसी है कि, वह ज्ञान का अपहरण कर व्यक्ति को क्रुरकर उसे अहंकारी बना देता है ।भगवान विष्णु का जलन्धर का रूप धारण करना 'शठ के साथ शठता' का उदाहरण तथा नारी के सम्मान का द्योतक है । वृन्दा के श्राप और पत्नी होने की कथा से स्पष्ट है कि,वह यह सन्देश दे रही है कि,व्यक्ति कभी भी जलन्धर का रूप नहीं धारण करना चाहिये और न ही नारी-सम्मान पर कभी भी आघात  पँहुँचाना चाहिये। इस प्रकार का आश्वासन मिलते ही तुलसी का शालिगराम के रूप में भगवान विष्णुजी से विवाह हुआ।

प्रबोध शब्द का अर्थ आश्वासन भी है।


शालिगराम एक विशेष प्रकार का पत्थर है ,जो हिमालय ( Himalaya ) और गंडकी नदी में पाया जाता है, पत्थर होने का निहतार्थ नारी के प्रति चंचल भाव त्याग कर दृढता  ज्यादा उपयुक्त है। 'प्रबोध' शब्द का सीधा अर्थ 'आश्वासन'  होता है।अन्य दैत्यों की भी कथा कुछ इसी तरह की वर्णित है। कार्तिक मास को पुण्यमास अर्थात दान का महीना माना गया है। ग्रीष्म ऋतु में प्रकृति का रूप बिगड़ जाता है,आकाशमण्डल में स्थित सूर्य का रूप बहुत कठोर हो जाता है,पृथ्वी की हरीतिमा झुलस जाती है, जल का अवशोषण हो जाता है, लेकिन जब भगवान विष्णु के योगनिद्रा से उठने का समय आता है तो, प्रकृति में स्वयं ही अनुकूलता आने लगती है। आकाश से खुशहाली का दान होने लगता है, अंतरिक्ष के इस दानी स्वरूप के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए इसे एक महापर्व बनाया गया, इस एकादशी तिथि से विवाहादि शुभ कर्म और अनुष्ठान शुरू हो जाते हैं । इस तरह कार्तिक एकादशी अध्यात्म के साथ वैज्ञानिक तथा सामाजिक सरोकारों को जानने का एक माहपर्व है ।