शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के प्रति शैक्षिक महासंघ लड़ेगा लड़ाई
सेवारत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़क तक संघर्ष करेगा राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ
बहराइच: परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक पात्रता परीक्षा लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर इसकी अनिवार्यता लागू किए जाने का विरोध तेज हो गया है।अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने ऐसे शिक्षकों को विधि और नीतिगत सेवा संरक्षण दिलाने के लिए देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है इसके तहत 18 जून को देशव्यापी ( सभी जिला मुख्यालय) पर प्रदर्शन कर विधायी संशोधन करके देश के लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा करने हेतु जिला अधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा माननीय मुख्यमंत्री जी कों भेजेगा ज्ञापन। इसी क्रम में मंगलवार कों राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बहराइच के जिलाध्यक्ष आनन्द मोहन मिश्र नें जानकारी देते हुए बताया कि, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद वर्ष 2010 से पूर्व व उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के हितों की एवं उनकी सेवा सुरक्षा तथा आजीविका की रक्षा के लिए कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि, राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लाखों शिक्षकों एवं उनके परिवारों की चिंता को देखते हुए केंद्र सरकार संवेदनशीलता एवं दूरदर्शिता का परिचय देगी तथा शिक्षकों में व्याप्त असमंजस, असुरक्षा एवं पीड़ा की स्थिति से समाधान हेतु आवश्यक कदम उठाएंगी।उन्होंने कहा कि, महासंघ ने सदैव शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए लोकतांत्रिक एवं संगठनात्मक तरीके से संघर्ष किया है । जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंकज कुमार वर्मा, जिला महामंत्री उमेश चंद्र त्रिपाठी, जिला कोषाध्यक्ष सगीर अंसारी सहित सभी जनपदीय पदाधिकारियों ने उपरोक्त कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु अधिक से अधिक संख्या में शिक्षक, शिक्षिकाओं से ज्ञापन प्रदर्शन कार्यक्रम में प्रतिभाग करने की अपील की है।

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