करनैलगंज /गोण्डा - नगर पालिका परिषद कर्नलगंज के सीमा विस्तार में धांधली, कूटरचना और फर्जी आंकड़े प्रस्तुत किए जाने के आरोपों का मामला अब न्यायालय की चौखट तक पहुंच गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) गोंडा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी गोंडा से सक्षम अधिकारी द्वारा प्रारंभिक जांच कराकर रिपोर्ट तलब की है। न्यायालय के इस आदेश के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
यह मामला जयप्रकाश सिंह बनाम सुजीत कुमार भारती एवं अन्य शीर्षक से न्यायालय में विचाराधीन है। वादी जयप्रकाश सिंह ने कहा है कि नगर पालिका परिषद कर्नलगंज के सीमा विस्तार के दौरान ग्राम पंचायत कादीपुर के संबंध में जनसंख्या एवं मतदाता संख्या से जुड़े अभिलेखों में हेराफेरी कर भ्रामक रिपोर्ट तैयार की गई। इसके माध्यम से ग्राम पंचायत के अस्तित्व और अधिकारों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। न्यायालय में दाखिल प्रार्थना पत्र में तत्कालीन हल्का लेखपाल सुजीत भारती, ग्राम पंचायत सचिव राजकुमार, सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) अभिषेक सिंह, खंड विकास अधिकारी श्रीकांत तिवारी, उपजिलाधिकारी हीरालाल समेत कई अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पक्षकार बनाया गया है। आरोप है कि सीमा विस्तार के लिए तैयार की गई रिपोर्टों में अलग-अलग समय पर विरोधाभासी आंकड़े प्रस्तुत किए गए, जिससे पूरे प्रकरण की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि मामला सरकारी कर्मचारियों से संबंधित है। इसी आधार पर 11 मई 2026 को पारित आदेश में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जिलाधिकारी गोंडा को निर्देशित किया कि प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोपों की किसी सक्षम अधिकारी से प्रारंभिक जांच कराकर 21 मई 2026 तक जांच आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।
न्यायालय के आदेश के अनुपालन में जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य राजस्व अधिकारी गोंडा ने 22 मई को उपजिलाधिकारी कर्नलगंज एवं जिला विकास अधिकारी को मामले की जांच कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसके बाद 25 मई को उपजिलाधिकारी कर्नलगंज ने तहसीलदार कर्नलगंज को जांच की जिम्मेदारी सौंपते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
मामले की निष्पक्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद सीमा विस्तार की प्रक्रिया में अनियमितता, फर्जीवाड़ा अथवा कूटरचना का खुलासा हो सकता है।
फिलहाल न्यायालय की सख्ती और प्रशासनिक जांच की कार्रवाई से उन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जिनके नाम शिकायत में शामिल किए गए हैं। स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि जांच के निष्कर्ष नगर पालिका सीमा विस्तार की पूरी प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। अब सभी की निगाहें न्यायालय में प्रस्तुत होने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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