Jun 1, 2026

वरिष्ठ पत्रकार के होनहार सुपुत्र दिव्यांश ने एनडीए व IIT दोनों में हासिल की कामयाबी, क्षेत्र में खुशी की लहर

 वरिष्ठ पत्रकार के होनहार सुपुत्र दिव्यांश ने एनडीए व IIT दोनों में हासिल की कामयाबी, क्षेत्र में खुशी की लहर

गोण्डा/कर्नलगंज। प्रतिभा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प का जब अद्भुत संगम होता है तो सफलता स्वयं कदम चूमती है। कर्नलगंज क्षेत्र के ग्राम कचनापुर के लिए गर्व और सम्मान का एक ऐतिहासिक क्षण सामने आया है। गांव निवासी, मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं मां वाराही न्यूज़ के संपादक सुभाष सिंह के होनहार सुपुत्र दिव्यांश प्रताप सिंह ने एक साथ देश की दो प्रतिष्ठित एवं कठिन परीक्षाओं राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) तथा आईआईटी प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त कर परिवार, क्षेत्र और जनपद का नाम रोशन किया है।दिव्यांश की इस उल्लेखनीय उपलब्धि ने पूरे क्षेत्र में हर्ष और गौरव का माहौल बना दिया है। जहां एक ओर उन्होंने एनडीए परीक्षा में सफलता हासिल कर भारतीय सशस्त्र बलों में सेवा देने के अपने सपने को नई दिशा दी है, वहीं आईआईटी जैसी देश की सर्वोच्च तकनीकी संस्थाओं में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त कर अपनी असाधारण बौद्धिक क्षमता का परिचय भी दिया है।ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की दो अत्यंत प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में एक साथ सफलता अर्जित करना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं माना जाता। दिव्यांश की यह सफलता उनके अथक परिश्रम, अनुशासित जीवनशैली, सकारात्मक सोच और लक्ष्य के प्रति समर्पण का प्रतिफल है। उनकी उपलब्धि आज क्षेत्र के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।दिव्यांश ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों तथा परिवार के सदस्यों को देते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन, आशीर्वाद और निरंतर प्रोत्साहन ने ही उन्हें यह मुकाम हासिल करने में सक्षम बनाया। उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास ही लक्ष्य तक पहुंचने का सबसे बड़ा माध्यम है।दिव्यांश की इस शानदार उपलब्धि पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों एवं शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी है तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।दिव्यांश प्रताप सिंह की यह दोहरी सफलता केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि पूरे कर्नलगंज क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है, जिसने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि दृढ़ निश्चय और मेहनत के बल पर हर ऊंचाई को छू सकती है।

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