करनैलगंज/गोण्डा - क्षेत्र ही नहीं बल्कि दूर दूर तक अपनी चिकित्सा सेवा व साहित्य के लिये बिख्यात रहे स्वर्गीय कवि राम कुशल सिंह'कुशल' को याद कर क्षेत्र के मनीषियों व साहित्यकारों ने उन्हें कबि सम्मेलन के माध्यम से अपनी श्रधांजलि अर्पित कर नमन किया। राम कुशल सिंह वैद्य सरस्वती साहित्य समिति के सक्रिय सदस्य थे। उनकी याद में नगर के विवेकानंद उ० मा०विद्यालय के प्रांगण सरस्वती साहित्य समिति के तत्वाधान में एक कवि गोष्ठी तथा शोक सभा का आयोजन किया गया,जिसकी अध्यछता 'कुशल' जी के सुपौत्र अखण्ड प्रताप सिंह(सत्यम) सिंह ने किया।संचालन राम कुमार मिश्र'कुमार' ने किया। आयोजित कार्यक्रम में कवियों ने अपने उदगार व्यक्त किये। सर्व प्रथम सरस्वती वन्दना कृष्ण कुमार सिंह'दीप'जी ने पढ़कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद अन्य लोगो ने उन्हें स्मरण कर अपनी पंक्तियों के माध्यम से श्रधांजलि अर्पित की।
अजब-गजब थे गीत छन्द दोहे आदि
'कुशल' की कृति अपने आप अभिराम है।
चित में भी भक्ति की प्रबल-प्रवृति,
और लेखन की वृत्ति भी रही अविराम है।
जन कल्याण हेतु'बैद्य'हो गए थे आप,
कल्याण का कर्म योग रहा ललाम है।
अमर शान्ति प्रभु आपको प्रदान करे,
'करुण' हृदय से करता प्रणाम है।
श्री अवधराज वर्मा'करुण'
सोंधी सुगंध माटी के लिए
जिंदगी जिये जबलो राम जियाये।
रामकृष्ण लाल श्रीवास्तव'लाल'
गोपाल सिंह वैदय जी को कौन नही जानता,
ग्राम लालेमऊ पूरे रौतन निवासी थे।
ज्येष्ठ पुत्र इनके श्री राम कुशल जी
अति ही उदार चित्त सरल मृदुभाषी थे।।
सन्त राम सिंह'सन्त'
सजल नयनो में छिपा उम्मीद अब भी बोलता है।
हर बुझा दीपक ज्वलन को लौ तुम्हारी खोजता है।।
कृष्ण कुमार सिंह'दीप'
अवधी के उत्थान में करते थे सहयोग।
बैद्य कुशल जी का हुआ,हम लोगो से वियोग। राम कुमार मिश्र
कार्यक्रम के अंत मे भगवान बक्श सिंह'रत्न',अंकित शर्मा, भीम,धर्मेन्द्र कुमार,संदीप बाजपेयी,अनुज मिश्र,आदर्श कुमार,शिव कुमार समेत कई अन्य लोगो ने शोक संवेदना व्यक्त की।
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