गोण्डा - उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले के परसपुर ब्लॉक में स्थित कडरू (कण्डरु) ग्राम सभा का भारेश्वर नाथ महादेव मंदिर (जिसे स्थानीय स्तर पर भारी महादेव मंदिर भी कहा जाता है) एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है। घने पेड़ों और शांत वातावरण के बीच स्थित यह शिवालय स्थानीय लोगों के बीच गहरी आस्था और अलौकिक शक्तियों का केंद्र माना जाता है। इस इस पौराणिक मंदिर की ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर की छत नहीं है, जब छत डाली जाती है तो रात में भरभरा कर गिर जाती है, यहां आज भी भारी महादेव को खुले आसमान में देखा जा सकता है।
इस मंदिर के इतिहास और महत्व से जुड़े मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं।
1. पौराणिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
प्राचीनता: स्थानीय मान्यताओं और इतिहास के अनुसार, यह मंदिर कई सौ वर्ष पुराना है। कडरू गांव के पास प्राकृतिक शांति के बीच स्थापित यह शिवधाम प्राचीन काल से ही ऋषियों और भक्तों की तपोभूमि रहा है।
• भारेश्वर नाथ नाम का रहस्य: मंदिर में स्थापित प्राचीन शिवलिंग को बाबा भारेश्वर नाथ के नाम से पूजा जाता है। "भारी महादेव" नाम इसी 'भारेश्वर' शब्द का स्थानीय अपभ्रंश है, जिसका अर्थ है दुखों का भार हरने वाले या अत्यंत प्रभावशाली महादेव।
2. मंदिर की वास्तुकला और परिसर
पारंपरिक निर्माण: कडरू का यह शिवालय पारंपरिक उत्तर भारतीय शैली में बना हुआ है। गर्भगृह में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, जिस पर निरंतर जल चढ़ाने और पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
शिव और शक्ति का वास: मंदिर परिसर में भगवान शिव के दिव्य विग्रह के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो इस स्थान को एक पूर्ण धार्मिक परिसर बनाती हैं।
3. धार्मिक महत्व और मान्यताएं
मनोकामना पूर्ति: ऐसी मान्यता है कि भारी महादेव के दरबार में सच्चे मन से मस्तक झुकाने और जलाभिषेक करने से भक्तों के सभी संकट दूर हो जाते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
विशेष पर्व और मेले: हर साल सावन मास, महाशिवरात्रि और विशेष रूप से कजरी तीज के पावन पर्व पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। वर्तमान में मंदिर की देखरेख की जिम्मेदारी मेवालाल गिरी कर रहे हैं।
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