Sep 24, 2026

गोंडा में छात्रवृत्ति सत्यापन के नाम पर अवैध वसूली, प्रधान लिपिक निलंबित



गोण्डा। जनपद के परसपुर स्थित तुलसी स्मारक इंटर कालेज में छात्रवृत्ति वेरिफिकेशन के नाम पर छात्रों से रुपये मांगने का मामला तूल पकड़ गया है। वायरल वीडियो सामने आने और खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) डा. रामचंद्र ने मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपी प्रधान लिपिक अनिल कुमार वर्मा के निलंबन को आधिकारिक मंजूरी दे दी है और विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।

19 सितंबर को वायरल हुआ था वीडियो

मामला 19 सितंबर शनिवार को सामने आए एक वायरल वीडियो से जुड़ा है। 33 सेकेंड के इस वीडियो में कालेज के प्रधान लिपिक अनिल कुमार वर्मा छात्रों से छात्रवृत्ति वेरिफिकेशन फार्म जमा करने के लिए 100-100 रुपये देने की बात कहते सुने जा रहे हैं। वीडियो में वह एक छात्र से घर से पैसे मंगाकर जमा करने को भी कह रहे हैं। एक अन्य वीडियो में भी इसी तरह 100 रुपये मांगे जाने की बात सामने आई थी।

वीडियो में डीआईओएस को दो हजार देने का दावा

सबसे गंभीर बात यह है कि वायरल वीडियो में प्रधान लिपिक यह दावा करते भी सुनाई दे रहे हैं कि निरीक्षण के दौरान डीआईओएस विद्यालय आए थे और उन्हें दो हजार रुपये दिए गए हैं। इस दावे पर डीआईओएस डा. रामचंद्र ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनके नाम पर दो हजार रुपये लेने की बात पूरी तरह गलत और निराधार है। उनके मुताबिक यह केवल छात्रों से अवैध वसूली के लिए दबाव बनाने का मामला है। विभागीय जांच में पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ जाएगी।

इस मामले की प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद डीआईओएस डा. रामचंद्र ने तुलसी स्मारक इंटर कालेज परसपुर के प्रबंधक और प्रिंसिपल को पत्र भेजकर पूरे मामले में कार्रवाई कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। डीआईओएस के निर्देश के बाद 21 सितंबर को विद्यालय प्रबंधक ने प्रिंसिपल भानु प्रताप सिंह और प्रधान लिपिक अनिल कुमार वर्मा से दो दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा था। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर प्रिंसिपल भानु प्रताप सिंह ने प्रधान लिपिक को निलंबित कर इसकी रिपोर्ट जिला विद्यालय निरीक्षक को भेजी। गुरुवार सुबह डीआईओएस डा. रामचंद्र ने प्रधान लिपिक के निलंबन को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी। साथ ही स्पष्ट किया कि किसी भी सरकारी या निजी विद्यालय में छात्रवृत्ति वेरिफिकेशन के नाम पर छात्रों को कोई पैसा देने की आवश्यकता नहीं है। किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।राष्ट्रीय छात्र पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवम पांडेय ने इस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर बड़े जिम्मेदार लोगों को बचाया जा रहा है। जब वायरल वीडियो में प्रधान लिपिक कथित तौर पर गोंडा के डीआईओएस के दो हजार रुपये लेकर जाने की बात कह रहा है, तो इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। साथ ही विद्यालय के प्रिंसिपल की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है। शिवम पांडेय ने कहा कि बच्चों के भविष्य और उनके अधिकारों के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो राष्ट्रीय छात्र पंचायत इस मुद्दे को और मजबूती से उठाएगी।

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