Sep 30, 2026

गोंडा जेल में बंद विचाराधीन कैदी की केजीएमयू में मौत पर हंगामा: बेटे ने कहा- स्वीट पॉइजन देकर राजनीतिक साजिश में हत्या



एसपी से दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर उच्चस्तरीय जांच की मांग

गोण्डा - जिला कारागार गोंडा में निरुद्ध विचाराधीन कैदी रामगनेश पुत्र राम लखन निवासी जनपद गोंडा की लखनऊ केजीएमयू में हुई मौत ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मृतक के बेटे ने पुलिस अधीक्षक गोंडा को शिकायती पत्र देकर पिता की मौत को स्वाभाविक नहीं, बल्कि राजनीतिक साजिश के तहत स्वीट पॉइजन देकर की गई हत्या बताया है और दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
मृतक के बेटे ने अपने शिकायती पत्र में लिखा है कि उसके पिता अभियोग संख्या 151/2019 धारा 307, 504, 506 SC/ST एक्ट के मामले में 28 जून 2026 से जिला कारागार गोंडा में निरुद्ध थे। जेल में रहने के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।

बेटे के गंभीर आरोप -

शिकायतकर्ता के अनुसार जेल में मुलाकात के दौरान उसके पिता कई बार बेहोश हो जाते थे। परिवार को आशंका है कि खाने में धीरे-धीरे असर करने वाला 'स्वीट पॉइजन' दिया जा रहा था। आरोप है कि मुकदमे के विपक्षी दिनेश प्रताप सिंह उर्फ विक्की व अन्य ने जेल प्रशासन के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और जेल चिकित्सकों से सांठगांठ कर पिता को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित कराया और इलाज में जानबूझकर लापरवाही बरती गई।
बेटे का आरोप है कि तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर पिता को लखनऊ मेडिकल कॉलेज/केजीएमयू रेफर किया गया, जहां परिजनों को बिना सूचना और बिना सहमति के ऑपरेशन कर दिया गया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। जबकि इससे पहले परिवार ने जेल अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर ऑपरेशन न करने की आपत्ति जताई थी। सबसे सनसनीखेज आरोप यह है कि पिता की मृत्यु के बाद विपक्षी दिनेश प्रताप उर्फ विक्की सिंह केजीएमयू अस्पताल में मृतक को देखने आया, जिसके बाद परिजनों को अस्पताल से बाहर कर दिया गया। परिजनों ने लखनऊ के चौक मेडिकल कॉलेज थाने में भी प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एसपी से न्याय की गुहार लगाते हुए बेटे ने 8 सूत्रीय मांग की है कि उनके पिता रामगनेश पुत्र रामलखन के जेल में निरुद्ध होने से लेकर मृत्यु तक की पूरी घटना की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी/स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराई जाए। मृत्यु के संबंध में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध पाए जाने पर संबंधित दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी एफआईआर दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जाए। जिला कारागार गोंडा में दी गई सभी दवाइयों, इंजेक्शनों एवं उपचार का पूरा विवरण प्राप्त कर उसकी जांच कराई जाए। जेल के मेडिकल रिकॉर्ड, मेडिकल रजिस्टर, दवा वितरण रजिस्टर, डॉक्टरों की रिपोर्ट तथा अन्य संबंधित अभिलेख तत्काल सुरक्षित कराए जाएं। लखनऊ मेडिकल कॉलेज/केजीएमयू के भर्ती रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, ऑपरेशन नोट, उपचार संबंधी दस्तावेज, डॉक्टरों की राय एवं मृत्यु संबंधी रिकॉर्ड को सुरक्षित कराकर स्वतंत्र रूप से जांच कराई जाय। शरीर में किसी विषैले अथवा हानिकारक पदार्थ की मौजूदगी की संभावना की जांच हेतु उपलब्ध विसरा/अन्य संरक्षित नमूनों की फोरेंसिक एवं टॉक्सिकोलॉजी जांच कराई जाए। यह जांच की जाए कि मेरे पिता का ऑपरेशन किन चिकित्सकीय परिस्थितियों में किया गया तथा परिजनों को इसकी सूचना और सहमति के संबंध में क्या प्रक्रिया अपनाई गई। जिला कारागार एवं अस्पताल में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, विजिटर रिकॉर्ड, कॉल/अन्य उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य तथा संबंधित दस्तावेज तत्काल सुरक्षित कराए जाएं, ताकि किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके।

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