Aug 18, 2026

साहित्यिक संस्था 'बज़्मे शामे ग़ज़ल' का सालाना तरही मुसालमा (मनक़बती मुशाए़रा) सम्पन्न

करनैलगंज /गोण्डा - साहित्यिक संस्था 'बज़्मे शामे ग़ज़ल' का सालाना तरही मुसालमा (मनक़बती मुशाए़रा) एम. ए . मेमोरियल मैरिज हाल मो० नई बाज़ार में आयोजित हुआ । कार्यक्रम की अध्यक्षता हाजी नसीर अंसारी बाराबंकवी ने की जब कि मुख्य अतिथि सय्यद उनूद चिश्ती (लखनऊ) रहे । आग़ाज़ हाफिज हिसामुद्दीन ने तिलावते कुरआन से किया व हमीद हामिद, रशीद बज़्म और इरफान मसऊदी ने नात व मनक़बत पेश किये । संरक्षक गणेश तिवारी 'नेश' ने कर्बला पर व्याख्यान दिया । महामन्त्री मुजीब सिद्दीक़ी ने स्वागत वक्तव्य देते हुए तरही मुसालमे पर प्रकाश डाला । याकूब सिद्दीक़ी 'अज़्म' के संचालन में मिसरा तरह " हुसैन इब्ने अली और कर्बला की बात करते हैं " पर शाए़रों ने सलाम पेश किए ।
      अध्यक्षता कर रहे नसीर अंसारी बाराबंकवी ने कहा - 
फरिश्तों में भी ज़िक्रे शाहे वाला होने लगता है -
जब इंसा पैकरे सब्रो रज़ा की बात करते हैं ।
कैफ़ हाशमी जरवली ने ज़ोर देकर कहा - 
वहां पर ज़िक्रे पाक हस्नैन का होता है फिर अक्सर -
जहां भी हम मुहम्मद मुस्तफा की बात करते हैं ।
डा० असलम हाशमी ने समस्या पूर्ति (तज़मीन) की -
कहां हम उस यज़ीदे बेहया की बात करते हैं -
" हुसैन इब्ने अली और कर्बला की बात करते हैं । " 
मुबीन मंसूरी ने इमाम हुसैन को समर्पित किया -
कभी कहते हैं जां अपनी कभी कहते हैं दिल अपना -
नबी यूं भी शहे कर्बो बला की बात करते हैं । 
सरवर किन्तूरी ने सवाल किया -
जिन्हें आले नबी के कातिलों से भी मुहब्बत है -
वो किस मुंह से शहीदे कर्बला की बात करते हैं ।
अनीस खां आरिफी ने पंजतन पाक को समर्पित किया - 
है बज़्में पंजतन तो मुस्तफा की बात करते हैं -
अली, हस्नैन, ज़हरा, सय्यदा की बात करते हैं ।
याकूब 'अज़्म' गोण्डवी ने कहा -
सरे फेहरिस्त नाम आता है हस्नैने मुअज़्ज़म का -
जो हम महबूबे महबूबे ख़ुदा की बात करते हैं ।
अब्दुल मन्नान "राज" जरवली ने कहा -
नमी आंखों में आती हैं ज़बां भी थरथराती है -
कभी जब वाक़याते कर्बला की बात करते हैं ।
सगीर अहमद सिद्दीकी  ने जीत और हार का पैमाना बताया -
बज़ाहिर हार कर जो जीत जाए अपने मक़सद में -
कि हम उस फ़िक्र की उस फलसफा की बात करते हैं।
साबिर अली गुड्डू ने कहा -
जो अब्बासे ज़री ने कर्बला में कर के दिखलाया -
जहां वाले अभी तक उस वफ़ा की बात करते हैं ।
अल्ताफ हुसैन राईनी ने अक़ीदत से कहा -
ये अल्ताफो इनायत हम पे है सुल्ताने जन्नत का -
जो हम भारत में सिब्ते मुस्तफा की बात करते हैं ।
हस्सान जलाल पुरी ने मतले में कहा -
यज़ीदीयत के हामी हुर्मुला की बात करते हैं -
हुसैनी फिक्र वाले कर्बला की बात करते हैं ।
मास्टर अलीम जरवली ने कर्बला के जांबाज़ो पर कहा -
सलाम उन अहले ईमां ग़ाज़ियाने दीने बरहक़ पर -
घिरे हैं मुश्किलों में और ख़ुदा की बात करते हैं ।
हाफिज़ निज़ामुद्दीन 'शम्स' ने कहा -
ग़में शब्बीर में बीमार रहना है सेहतयाबी -
मरीज़ाने मुहब्बत कब शिफा की बात करते हैं ।
तनवीर नूरी जरवली ने दुआ की बात कही -
हुसैन इब्ने अली ने उम्मते जद के लिए रन में -
जो ज़ेरे तेग़ दी थी उस दुआ की बात करते हैं ‌।
यासीन राजू अंसारी ने दुखद मंज़र पेश किया -
न देखा आसमां ने भी कभी जैनब को नंगे सर -
कि जो छीनी गई हम उस रिदा की बात करते हैं ।
अभिषेक श्रीवास्तव (गोण्डा) ने श्रद्धापूर्वक कहा -
ये भारत है हमारा कि यहां हर साल हिन्दू भी -
हुसैन इब्ने अली और कर्बला की बात करते हैं ।
इमरान मसऊदी ने आईना दिखाया -
जो दिल में बुग्ज़ रखते हैं नबी की आले अतहर से -
वो किस मुँह से नबी से आसरा की बात करते हैं।
      साथ ही मुजीब सिद्दीक़ी, ताज मुहम्मद कुरबान, कौसर सलमानी व सलीम बेदिल ने कलाम पेश किये । संरक्षक अब्दुल गफ्फार ठेकेदार ने धन्यवाद ज्ञापित किया ।
इस अवसर पर हाज़ी ज़हीर वार्सी, मास्टर रज़ा, डा० मुख्तार आज़ाद, कय्यूम सिद्दीक़ी, डा०‌‌ शाहिद, अब्दुल खालिक, गुलज़ार मक्खन, शाहिद रज़ा एडवोकेट, आजम खां, आफाक सिद्दीक़ी, अहमद अली अंसारी, हाजी वसीम अहमद, शकील वार्सी, तौकीर राजू, खुर्शीद आलम, रहबर हुसैन खां, समी बक़ाई, मो० अख़तर, आदिल असलम, नसीम रौशन, दानिश अंसारी, महताब आलम, इरशाद छोटकऊ, डा०‌ शहज़ाद,मास्टर इकबाल,मेराजुद्दीन, आसिफ, अशरफ कुरैशी, शब्बू सिद्दीक़ी, सिराज अहमद, राक़िम वार्सी, इमरान, रेहान, शारिक सहित अन्य मौजूद रहे ।

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