गोण्डा-बलरामपुर के रामलीला मैदानों और प्राचीन शिवालयों के विकास को मिली गति
22.18 करोड़ से संवर रहा स्वामीनारायण छपिया धाम, बढ़ेंगी श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं
बट्ठा कुटी स्थल और सीताद्वार पर बढ़ेंगी सुविधाएं, श्रद्धालुओं का सफर होगा आसान
छह महीने में पूरी हों 1.5 करोड़ तक की परियोजनाएं, गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता : जयवीर सिंह
गोण्डा - उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने शुक्रवार को गोंडा के महाराजा सुहेलदेव सभागार में देवीपाटन मंडल की पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग की प्रस्तावित और निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा अधिकारियों को गुणवत्ता, समयबद्धता और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना के तहत लगभग 18.35 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 16 पर्यटन परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना के अंतर्गत गोंडा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती जनपदों की कुल 15 पर्यटन परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इनमें गोंडा की 7, बहराइच की 4 तथा बलरामपुर की 3 और श्रावस्ती की 2 परियोजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना, श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करना और प्रमुख आस्था स्थलों को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ना है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यटन विकास कार्यों का उद्देश्य केवल आधारभूत ढांचा तैयार करना नहीं, बल्कि प्रत्येक स्थल की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक करोड़ रुपये तक की सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं को नवंबर 2026 तक उच्च गुणवत्ता के साथ हर हाल में पूरा किया जाए तथा सभी कार्यों में जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखा जाए। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 1.5 करोड़ रुपए तक सभी परियोजनाएं 6 महीने के भीतर पूरी की जाएं ।
मां नदना देवी मंदिर से चारों धाम तक विकास की तैयारी
गोण्डा जनपद में सबसे अधिक सात पर्यटन परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इनमें मां नदना देवी मंदिर, जंबूद्वीप (राम जानकी मंदिर), अद्वैत स्वरूप आश्रम (शंकर जी मंदिर), भगवान कपिल मुनि आश्रम, भक्ति धाम और चारों धाम सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण, आधारभूत सुविधाओं के विकास और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं विकसित करने के प्रस्ताव शामिल हैं।
साथ ही गोंडा स्थित स्वामीनारायण छपिया मंदिर के पर्यटन विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। लगभग 22.18 करोड़ रुपये की लागत से संचालित इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति संतोषजनक पाई गई। परियोजना के तहत पर्यटक सुविधाओं का विस्तार, मंदिर परिसर की आकर्षक फसाड लाइटिंग (बाहरी प्रकाश व्यवस्था) तथा श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसका उद्देश्य छपिया धाम को एक प्रमुख आध्यात्मिक एवं धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करते हुए श्रद्धालुओं के यात्रा अनुभव को और बेहतर बनाना है।
बहराइच में प्रज्ञा शिव शक्ति मंदिर, प्राचीन जंगलीनाथ मंदिर, जगम्रवा बाबा मंदिर और समय माता मंदिर के विकास की योजनाओं की समीक्षा की गई। वहीं बलरामपुर में समय माता मंदिर के विकास तथा श्रावस्ती में बट्ठा कुटी स्थल और सीताद्वार पर पर्यटक सुविधाओं और आधारभूत ढांचे के विस्तार के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई, ताकि इन स्थलों की धार्मिक पर्यटन क्षमता को और मजबूत बनाया जा सके।
*रामलीला मैदानों के विकास पर भी विशेष जोर*
संस्कृति विभाग की परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान गोंडा और बलरामपुर के रामलीला मैदानों के सौंदर्यीकरण एवं पुनर्विकास के दो प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। इसके साथ ही लगभग 3.39 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किए जा रहे महाराज परमहंस बरियाडीह रामलीला मैदान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को कार्यों को तय समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए गए।
धर्मार्थ कार्य विभाग ने बैठक में चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत किए। इनमें गोण्डा के गोरिनाथ शिवाला, बहराइच के शिव बागेश्वरनाथ मंदिर, तथा श्रावस्ती के पांडवकालीन प्राचीन मुंडा शिवाला मंदिर और एक अन्य प्राचीन शिवाला के अनुरक्षण, सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास से जुड़े प्रस्ताव शामिल रहे। इन योजनाओं का उद्देश्य धार्मिक धरोहरों का संरक्षण करते हुए श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
बैठक में वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग की स्वीकृत और निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को नियमित स्थलीय निरीक्षण, निर्माण कार्यों की सतत निगरानी और समयबद्ध ढंग से परियोजनाएं पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देवीपाटन मंडल की यह समीक्षा प्रदेश के सभी 18 मंडलों में चल रहे पर्यटन विकास अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करना और उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी पर्यटन राज्यों में स्थापित करना है।
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