ज्यादातर मामलों में सगे-संबंधी भी आरोपी बना दिए जा रहे हैं। कुछ मामलों में उन्हें पता ही नहीं होता है कि किसने क्या गुल खिलाया। बावजूद इसके वह थाना-कचहरी और जेल काटने पर मजबूर हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित पक्ष तहरीर लेकर आता है कि बालिग या नाबालिग लड़की लेकर भागने में आरोपी की मां, भाई, पिता या अन्य रिश्तेदार ने भी सहयोग किया।
इस आधार पर मुकदमे में उनका नाम भी शामिल करना पड़ता है। तफ्तीश में यदि उनकी संलिप्ता नहीं रहती तो उनका नाम मुकदमे से निकाल दिया जाता है। इस विडंबना के फेर में पड़ चुके भुक्तभोगियों का आरोप है कि नाम निकालने के लिए पुलिस को रुपये देने पड़ते हैं।
समाजशास्त्री डॉ. रघुवर पांडेय का कहना है कि इस तरह के मामले समाज में विकृति का रूप अख्तियार करते जा रहे हैं। असंतुलित गतिविधि दिखाई देने पर परिवार वाले दबाव बनाते हैं तो उन्हें पुरानी विचारधारा का बताकर झूठा करार देने का प्रयास किया जाता है। यही बात आगे चलकरसमाज में बदनामी का कारण बन जाती है।
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी नारायण कहते हैं कि इस तरह के मामले बेहद संवेदनशील होते हैं। जिसके परिवार की लड़की घर छोड़कर भागती है वह सामाजिक दबाव और मानसिक रूप सेपरेशान होता है। लड़के के परिवार या सगे-संबंधी की भले ही इसमें भूमिका नहीं होती, लेकिन अभिभावक होने के नाते उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाता है। इसमें पुलिस की तफ्तीश काफी मायने रखती है। विवेचकों को संवेदनशीलता से गुणदोष को देखते हुए आरोपपत्र तैयार करना चाहिए।
शहर के एक मोहल्ले के किशोर और किशोरी के बीच प्रेम प्रसंग शुरू हुआ। करीब छह महीने के बाद दोनों स्कूल के लिए निकले, लेकिन वहां न जाकर गुरुग्राम चले गए। लड़की के परिवार के लोगों ने कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया, जिसमें आरोपी के माता, पिता, बहन और भाई को बनाया गया। पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बाद में तफ्तीश में पाया गया कि इन चारों की कोई भूमिका नहीं थी।
नगर थानाक्षेत्र के एक युवक-युवती का प्रेम प्रसंग लोगों में चर्चा का विषय बन गया था। कुछ दिनों बाद दोनों घर छोड़कर भाग गए। दोनों अपने-अपने घर से नकदी व जेवरात भी लेकर गए। लड़की के परिवार वालों को गुस्से में कुछ नहीं सूझा तो लड़के के भाई और पिता पर सरेराह हमला कर दिया। इस पर एक और मुकदमा थाने में दर्ज हुआ। नतीजन दोनों को जेल जाना पड़ा।
रुधौली बस्ती से अजय पांडे की रिपोर्ट
No comments:
Post a Comment