Oct 19, 2020

लाखों के आस्था केंद्र बेलवा सम्मय मन्दिर का निर्णोधार,प्राण प्रतिष्ठा के साथ विशाल भंडारे का आयोजन,राजघराने से जुड़ा है इतिहास।

 
करनैलगंज/गोण्डा - पूरे हर्षोल्लास के साथ सजी सँवरी महिलायें अपनी इच्छा पूर्ति हेतु मन्नते माँगती बेटियां तथा अपने हाथों में धूप दीप अक्षत,फूल,माला तथा मिष्ठान आदि पूजन सामग्री लेकर सैकड़ो की संख्या में तमाम श्रद्धालुओं का जमावड़ा आपको दोनो नवरात्रि के दिनों में देखने को मिलेगा आस्था के इस अति पौराणिक केंद्र पर जिसका इतिहास 6वों द्वारा में शामिल शाहपुर राजघराने से जुड़ा माना जाता है।आज हम बात कर रहे हैं स्थानीय तहसील क्षेत्र अंतर्गत करनैलगंज-शाहपुर मार्ग पर सकरौरा ग्रामीण स्थित बेलवा सम्मय माता मन्दिर की। जहाँ किसी सोने चांदी या संगमरमर जड़ित मन्दिर नहीं बल्कि सदियों पुराने एक बेल पर बिराजमान शक्ति स्वरूपा जगदम्बा अपने भक्तों का कष्ट दूर करती हैं और बेल पर निवास करने के कारण इनका नाम बेलवा सम्मय माता के रूप में सुविख्यात है।

आपको बता दें कि कभी अति बिरान जंगलो में छुपा यह निर्जन स्थान अब शिक्षा का बहुत बड़ा हब बन चुका है यहाँ आश्रम पद्धति विद्यालय से लेकर सरयू डिग्री कालेज, मत्स्य शोध संस्थान तथा पॉलीटैक्निक संस्थान सुदूर के छात्रों का अध्ययन केंद्र है। यहां मन्दिर के दक्षिण बगल एक पीपल का पेड़ तथा पूरब तरफ बजरंगबली का मंदिर है जिसकी प्रत्येक मंगलवार व शनिवार को परिक्रमा व पूजा अर्चना कर लोग मन्नते मांगते हैं। सकरौरा ग्रामीणय में ही यहाँ से मात्र कुछ ही दूरी पर सरयू तट स्थित अगस्त मुनि का पौराणिक आश्रम है ऐसी मान्यता है कि इस आश्रम पर कभी भगवान श्रीराम सीता व भाई लक्ष्मण के साथ आकर रात्रि विश्राम किये थे।


 

बेलवा सम्मय माता मन्दिर के महत्व के बारे में लोगो का कहना है कि जो व्यक्ति सच्चे दिल से मन्नत माँगता है उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। तहसील क्षेत्र के हलधरमऊ ब्लाक अंतर्गत कोंचा कासिमपुर (सालपुर) निवासी दिग्विजय सिंह जो करीब पाँच वर्षों से प्रत्येक सोमवार व शुक्रवार को मन्दिर पर पूजा करने आते हैं का कहना है कि, कुछ वर्षों पूर्व जब उनकी पत्नी बहुत अस्वस्थ रहती थीं, जिसे लेकर वह बहुत परेसान थे किसी पण्डित की राय पर वह बेलवा सम्मय माता मन्दिर आने लगे तो मात्र कुछ ही दिनों में उनकी पत्नी स्वस्थ हो गईं। तभी से चाहे पानी बरसे,पत्थर गिरे वह लगातार प्रत्येक सोमवार व शुक्रवार को पूजा करने यहाँ जरूर आते हैं। वहीं सकरौरा ग्रामीण निवासी अमृत लाल यादव जिनका घर मन्दिर से पूरब कुछ ही दूरी पर है इनका छोटा भाई कुछ वर्षों पूर्व किसी बीमारी या हवा के चलते अचेत हो गया उसकी आंखे पलट गई परिजनों में हतासा छा गयी सैकड़ो की भीड़ लग गयी,पड़ोस के डॉक्टर भी कुछ नही समझ पाए तो अमृत लाल जो सम्मय माता पर बहुत आस्था रखता है। उसने अपने छोटे भाई को मन्दिर में लाकर अरदास लगाकर बोला कि माँ यदि मेरा भाई ठीक नहीं हुआ तो तेरे दरबार की महिमा घट जायेगी। कुछ ही देर में उनका छोटा भाई उठकर बैठ गया जो आज भी स्वस्थ है तथा मेहनत मजदूरी करके अपना घर चलता है। तभी से लगातार अमृत लाल यादव माता के मन्दिर की सुबह साफ सफाई पूजा अर्चना तथा सांयकाल में दीपदान का कार्य करते आ रहे हैं।


धार्मिक अनुष्ठान व अन्य पवित्र संस्कारों के लिये प्रसिद्ध ये मन्दिर स्थल

बेलवा सम्मय माता का ये सदियों पुराना मन्दिर धार्मिक अनुष्ठान व लोगों के शुभ संस्कारो के लिये बहुत प्रसिद्ध माना गया है। वर्ष के शारदीय व वासन्तिक नवरात्रि के दिनों में यहाँ बच्चों के मुण्डन संस्कार के लिये भारी भीड़ लगती है। आस पास के लोगो द्वारा नव विवाहित जोडे को सर्व प्रथम यहाँ लाकर दर्शन पूजन कराने की पुरानी प्रथा चली आ रही है। अपनी माँगी गयी मन्नत पूर्ण होने पर लोगो द्वारा यहाँ रामचरित मानस पाठ, भजन कीर्तन तथा यज्ञ व भंडारे का आयोजन किया जाता है। माह के प्रत्येक सोमवार व शुक्रवार को यहाँ भी यहाँ श्रद्धालुओ का जमावड़ा देखा जा सकता है।


शाहपुर राजघराने से जुड़ा है इस मन्दिर का इतिहास


 जनपद गोण्डा में कलहंसो के छः राजद्वारे हुआ करते थे जिसमें एक शाहपुर राजघराना भी शामिल था । बुजुर्गों के मुताविक शाहपुर स्टेट के राजा की सम्मय माता मन्दिर पर बहुत गहरी आस्था थी और राजपरिवार यहाँ पूजा अर्चना करने आता था। जिसके चलते शाहपुर स्टेट द्वारा राहगीरों की सुविधा हेतु मन्दिर के पास दो कुंओ का निर्माण करवाया गया तथा छाया के लिये आम, इमली,पीपल आदि पेड़ लगवाये आज भी वहाँ ईमली पीपल तथा राजपरिवार द्वारा निर्मित कुंआ खण्डर के रूप में अपनी प्राचीनता की गवाही दे रहा है।



सांसद करीबी अशोक सिंह ने उठाया जीर्णोद्धार का वीणा।


जनपद ही नही बल्कि अन्य जनपदों से आ रहे श्रद्धालुओं के आस्था का यह केंद्र सैकड़ो वर्षो से अपनी नवीनता का राह देख रहा था जिसे कैसरगंज सांसद बृज भूषण शरण सिंह के करीबी माने जाने वाले अशोक सिंह ने जनसहयोग से पूरा कराया। उन्होंने स्थानीय जनसहयोग से पूरे मन्दिर का जीर्णोद्धार कराया ।इस मौके पर बाराबंकी (फतेहपुर) से आये पण्डित अखिलेश चन्द्र शास्त्री की देखरेख में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कचचनापुर कुटी घाट स्थित सरयू से कलश यात्रा निकाली गई। मन्दिर से दूसरे दिन आस पास के गांवो में शोभायात्रा निकाली गई और भगवान भोलेनाथ के रुद्राभिषेक व यज्ञ के बाद शक्ति स्वरूपा माँदुर्गा व मॉं आदिशक्ति काली जी की प्रतिमा रखकर प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। तथा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें हजारों की संख्या में पहुँचकर माँ भक्तो ने प्रसाद गृहण किया। इस दौरान अशोक सिंह,राम प्रसाद यादव प्रबन्धक सांई एजुकेशन,ज्वाला प्रसाद तिवारी,बड़कऊ यादव,शिव शंकर सविता, माधवराज यादव,रवि प्रताप सिंह,विवेक सिंह,हर्षित सिंह,सन्तोष सिंह, प्रिंस सिंह, पवन ओझा, सत्यम सिंह,मनमोहन भारती, प्रवीण भट्ट, रमेश सिंह पूर्व प्रधान,गणेश पाण्डेय,अखण्ड प्रताप सिंह, मान सिंह,ज्ञान बहादुर सिंह, शशाांक सिंह, भोली सिंह,शिव जी दुबे, पीयूष अग्रवाल,  किशोरी लाल गुप्ता, शिव नारायन यादव,महेश सिंह,विनोद सिंह ,सहित अन्य तमाम लोग शामिल रहे।


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