भगवान गणेश की मूर्ति बनाई जाती है, उसकी महीनों पूजा की जाती है और उसे अगले वर्ष वापस पाने के लिये प्रकृति को सौंप दिया जाता है, इसी तरह हम भी संसार मे जन्म लेते हैं और अपनी जिम्मेदारियों व कर्तव्यों को पूर्ण करके समय समाप्त होने पर पुनः नवजीवन के आशा के साथ मृत्यु की गोद मे समा जाते हैं।
जानें गणेश के वाहन - गणेश पुराण के अनुसार- सिंधु नामक दैत्य के अत्याचार से देवताओं के रक्षार्थ भगवान गणेशजी ने अपना वाहन मयूर चुना, और छः भुजाओ वाला अवतार लेकर और आततायी दैत्य का संघार किया, इसी से इन्हें मयूरेश्वर नाम से भी पूजा गया , जो कालांतर में मोरया हो गया। श्रीमद्भागवत अनुसार- महर्षि वेदव्यासजी ने गणेश चतुर्थी से ही भागवत शुरू की थी, जिसे गणेशजी ने अपने एक दांत से लिपिबद्ध किया , कथा समाप्ति पर व्यास जी ने देखा कि, गणेशजी का शरीर बहुत गरम हो गया है, व्यास जी ने उन्हें एक जलकु ण्ड में बैठाकर उनका ताप शान्त किया, तभी से गणेशजी की स्थापना, पूजा, अर्चना के बाद प्रतिमा विसर्जन की परम्परा उत्सव के रूप में शुरू हुई।
इसी परम्परा व पौराणिकता के निर्वहन में करनैलगंज कस्बे में भी विगत कई वर्षों से गणेश प्रतिमा रखी जाती है, शनिवार को गणेश प्रतिमा विषर्जन के मौके पर कस्बावासियों व भक्तो द्वारा भारी संख्या में जलूस निकालकर सरयू नदी में विषर्जन हेतु ले जाया गया।
बताते चलें कि शनिवार का दिन प्रशासन के लिये किसी चुनौती से कम नहीं है क्योंकि एक तरफ नगर में गणेश प्रतिमा विसर्जन का जुलूस चल रहा है, वहीं दूसरी ओर सातवीं का भी जुलूस चल रहा है, फिलहाल पुलिस की सक्रियता से आमजन मानस में अमन व शान्ति का वातावरण दिख रहा है।
जानें गणेश के वाहन - गणेश पुराण के अनुसार- सिंधु नामक दैत्य के अत्याचार से देवताओं के रक्षार्थ भगवान गणेशजी ने अपना वाहन मयूर चुना, और छः भुजाओ वाला अवतार लेकर और आततायी दैत्य का संघार किया, इसी से इन्हें मयूरेश्वर नाम से भी पूजा गया , जो कालांतर में मोरया हो गया। श्रीमद्भागवत अनुसार- महर्षि वेदव्यासजी ने गणेश चतुर्थी से ही भागवत शुरू की थी, जिसे गणेशजी ने अपने एक दांत से लिपिबद्ध किया , कथा समाप्ति पर व्यास जी ने देखा कि, गणेशजी का शरीर बहुत गरम हो गया है, व्यास जी ने उन्हें एक जलकु ण्ड में बैठाकर उनका ताप शान्त किया, तभी से गणेशजी की स्थापना, पूजा, अर्चना के बाद प्रतिमा विसर्जन की परम्परा उत्सव के रूप में शुरू हुई।
इसी परम्परा व पौराणिकता के निर्वहन में करनैलगंज कस्बे में भी विगत कई वर्षों से गणेश प्रतिमा रखी जाती है, शनिवार को गणेश प्रतिमा विषर्जन के मौके पर कस्बावासियों व भक्तो द्वारा भारी संख्या में जलूस निकालकर सरयू नदी में विषर्जन हेतु ले जाया गया।
बताते चलें कि शनिवार का दिन प्रशासन के लिये किसी चुनौती से कम नहीं है क्योंकि एक तरफ नगर में गणेश प्रतिमा विसर्जन का जुलूस चल रहा है, वहीं दूसरी ओर सातवीं का भी जुलूस चल रहा है, फिलहाल पुलिस की सक्रियता से आमजन मानस में अमन व शान्ति का वातावरण दिख रहा है।
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