Sep 23, 2026

साहित्यिक संस्था बज्मे शामे गजल मुशायरा सम्पन्न

करनैलगंज /गोण्डा - साहित्यिक संस्था 'बज़्मे शामे ग़ज़ल' का सालाना नातिया तरही मुशाएरा सग़ीर नज़ीर मार्केट (हाजी यासीन मंज़िल) बालूगंज में आयोजित हुआ । हाजी नसीर अंसारी बाराबंकवी और गणेश तिवारी 'नेश' के संरक्षण में कार्यक्रम की अध्यक्षता क्रमशः मुख़तार फारुकी (देवा ) व मुईद रहबर लखनवी ने की । 
सूफी हसीबुद्दीन खां क़ादरी मुख्य अतिथि रहे जबकि विशिष्ट अतिथि के तौर पर उ०प्र० कोषागार यूनियन के प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष नज़मी  कमाल खां (सिद्धार्थनगर) शामिल हुए । 
         महामन्त्री मुजीब सिद्दीक़ी ने स्वागत वक्तव्य दिया । संरक्षक गणेश तिवारी 'नेश' की पुस्तिका 'हिजरते रसूल' का विमोचन भी इस अवसर पर हुआ । 
याकूब सिद्दीक़ी 'अज़्म' के संचालन में मिसरा तरह 'जब कहा सल्ले अला आक़ा की मिदहत हो गई ' पर नातिया कलाम पढ़ें गये । 
अध्यक्षता कर रहे मुख़तार फारुकी ने कहा - 
अर्ज़े तैबा में मिले मुख़तार गर दो गज़ जमीं -
तब मैं समझूंगा मेरी मिट्टी सुवारत हो गई ।
मुईद 'रहबर' लखनवी ने कहा - अपनी ताक़त पर बहुत बू जहल नाज़ां था मगर -
बद्र के मैदा में देखो, उस की क्या गत हो गई ।
सग़ीर नूरी बाराबंकवी ने किस्मत की बात कही -
तेरे हिस्से में शहंशाहे दो आलम आ गये - 
सब पे भारी ऐ हलीमा तेरी क़िस्मत हो गई ।
क़य्यूम हाशमी 'कैफ' जरवली ने कहा -
मैं रसूलुल्लाह की तौसीफ जब लिखने लगा -
थक गया मेरा क़लम लफ्ज़ों की किल्लत हो गई ।
अनीस खां आरिफी ने निस्बत पर फख्र किया -
आप के अहले वफा थे सिलसिला दर सिलसिला -
आप से निस्बत मेरी निस्बत ब निस्बत हो गई ।
फसीह खां 'राज' उतरौलवी ने कहा -
क्या जलाए गी उसे नारे जहन्नम दोस्तो -
सरवरे कौनेन से जिस को मुहब्बत हो गई ।
रईस सिद्दीक़ी बहराइची ने कहा -
जिस ने ईमां की नज़र से देखा दरबारे नबी -
ऐ 'रईस' उस की तो बख्शिश की ज़मानत हो गई ।
नजमी कमाल गोण्डवी ने हज़रत मुहम्मद स० की आमद पर कहा - 
आप के आने से दुनियां को मिली इक रौशनी -
हर तरफ फैली हुई तारीकी रुख़सत हो गई ।
डां सुब्हान 'शाद' बलरामपुरी ने कहा -
जब शऊरी तौर पर आक़ा से उल्फत हो गई -
मुझ को हासिल नात कहने की सआदत हो गई ।
फौक़ बहराइची ने सवाल किया -
चांद पर इंसान पहुंचा, कर लिया इस का यकीं -
और मेराजे नबी पर यारो हैरत हो गई ।
रियाज़ सहर वार्सी ने हुज़ूर के अवतरण पर कहा -
शोर उट्ठा ये जमीनों आसमां में चार सू -
सय्यदा ज़हरा के बाबा की विलादत हो गई ।
साबिर अली गुड्डू ने हज़रते हसन व हुसैन की अज़्मत बयान की -
कह दिया आक़ा ने सरदारे जिनां हस्नैन को -
नाम से अब दोनों शहज़ादों के जन्नत हो गई ।
हस्सान जलाल पुरी ने बताया -
सरहदे शहरे मदीना में हुआ जब दाखिला -
ज़िन्दगी को यूं लगा पूरी ज़रुऱत हो गई ।
यासीन अंसारी 'राजू' ने ज़ोर देकर कहा -
मुस्तफा ने एक काले को भी यूं कुन्दन कर दिया -
सब हसीनाने जहां में उसकी शोहरत हो गई ।
इमरान मसऊदी ने हज़रत इमाम हुसैन को समर्पित किया -
साये में तेग़ों के सजदा जब किया शब्बीर ने -
जिसको कहते हैं इबादत वो इबादत हो गई ।
अभिषेक श्रीवास्तव ने श्रद्धासुमन अर्पित किया-
पूछते हैं हम से क्यों आक़ा से चाहत हो गई -
हम यही कहते हैं कि उनकी इनायत हो गई ।

तनवीर नूरी जरवली ने कहा -
दफ्न ज़िन्दा बच्चियों का खत्म होगा सिलसिला -
रहमतुल्लिल आलमीं की अब हुकूमत हो गई ।
       साथ ही नसीर अंसारी बाराबंकवी, मुजीब सिद्दीक़ी, डां असलम हाशमी, डां रिज़वान अलीग, नियाज़ क़मर, मेराज शिवपुरी, मन्नान राज़ जरवली, सग़ीर सिद्दीक़ी, मुबीन मंसूरी, क़ारी शकील अशरफी,‌ शब्बीर शाद, कौसर सलमानी, अल्ताफ राईनी, निज़ामुद्दीन शम्स, का़री आज़ाद अशरफी, ज़ाकिर अशरफी, इरफान मसऊदी, मेराज अनवर का़दरी ने कलाम पेश किये । इस अवसर पर हाज़ी ज़हीर वार्सी, कय्यूम सिद्दीक़ी, ताज मु० कुरबान, शेख शम्स (इंकलाब ब्यूरो), डां हबीबुल्लाह, मो० इदरीस, हनीफ खां, हाजी वसीम राईनी, आदिल असलम, मास्टर शफीक, मास्टर इक़बाल, हाफिज़ हिसामुद्दीन,  आशिक रसूल, इख़लाक वारिस, इरशाद छोटकऊ, नुसरत अली वार्सी, अहमद अली अंसारी, साजिद सभासद, हाफिज़ रिज़वान, मास्टर अकरम जरवली, मसऊद आलम,  डा. शहज़ाद, आज़ाद आरिफी, गुड्डू अब्बासी, मेराजुद्दीन सहित उपस्थित रहे । सग़ीर सिद्दीक़ी ने धन्यवाद ज्ञापित किया । संरक्षक अब्दुल गफ्फार ठेकेदार की सेहत और शिफा की दुआ करते हुए मानव कल्याण की दुआ की गई ।

No comments: