गोण्डा - आज उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले में एक अलोकतांत्रिक घटनाक्रम सामने आई है, जिसे लेकर पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह को स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा उनके आवास पर जबरन हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर दिया गया। हाउस अरेस्ट किए जाने पर पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह नाराज हो उठे और उक्त कार्रवाई कोचतानाशाहीपूर्ण, अलोकतांत्रिक बताते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हाल ही में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने गोण्डा दौरे के दौरान यह सवाल उठाया था कि भारी पुलिस बल और बंदोबस्त के बावजूद सपा के मंत्री (योगेश प्रताप सिंह) घटनास्थल तक कैसे पहुंच गए? इस बयान से साफ जाहिर होता है कि सत्ता पक्ष बौखलाया हुआ है और अपनी नाकामी छुपाने के लिए विपक्ष के नेताओं पर सवाल उठा रहा है। बीते दिनों यह बार-बार देखा गया है कि विपक्ष और सत्ता विरोधी हर आवाज को स्थानीय विधायक की शह पर इस सरकार में दबाया जा रहा है। किसी मासूम को मारना-पीटना और फर्जी मुकदमे लिखना आम बात हो गई है। ठाकुर, ब्राह्मण, पिछड़ा, हरिजन, अमीर-गरीब—सब इस सरकार की तानाशाही से पीड़ित हैं। पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह ने इस दमनकारी कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि,सरकार और प्रशासन चाहे जितनी बैरिकेडिंग कर लें, चाहे मुझे घर में नजरबंद कर लें, लेकिन गोंडा में अत्याचार के ख़िलाफ़ न्याय दिलाने की हमारी लड़ाई और पीड़ितों के आंसुओं को पोछने का हमारा संकल्प रुकने वाला नहीं है। मैं हर उस पीड़ित के साथ खड़ा हूँ जिसे ज़िला प्रशासन विधायक की शह पर प्रताड़ित करती है और भोले-भाले लोगों का जीवन बर्बाद करती है। पुलिस-प्रशासन अपनी प्रशासनिक नाकामी और लीपापोती को छुपाने के लिए इस तरह के ओछे हथकंडे अपना रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का यह कदम साफ तौर पर यह साबित करता है कि प्रदेश में सच की आवाज को दबाने और अपराधियों को संरक्षण देने वाला तंत्र सक्रिय है। हम इस हाउस अरेस्ट की पुरजोर भर्त्सना करते हैं और मांग करते हैं कि प्रशासन अपनी इन हरकतों को तुरंत बंद करे तथा भारत के संविधान को सर्वोपरि मानकर केवल एक दल और विधायक के इशारों पर काम करना बंद करे।
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