बाल श्रम हॉटस्पॉट पर फोकस
बहराइच । बाल श्रम मुक्त बहराइच बनाने के लिए व्यापार संगठनों, ईंट भट्ठा एसोसिएशन, विभिन्न रेस्टोरेंट मालिकों का सहयोग बहुत जरूरी है। इन सभी उपक्रमों को न सिर्फ़ बाल श्रम मुक्त बहराइच बनाने का प्रण लेना होगा बल्कि अपने एसोसिएशन के अंतर्गत आने वाले सभी प्रतिष्ठानों में यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी बच्चा काम ना करें। साथ ही बाल एवं किशोर प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम 1986 के अंतर्गत जिन अधिकारियों को बाल श्रम रोकने के लिए निर्गत किया गया है, उनको अपने क्षेत्रों में बाल श्रम मुक्ति के लिए अभियान चलाना होगा।यह बात श्रम विभाग, ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट एवं रोजा संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वासन विषय पर विकास भवन सभागार में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने कही। उन्होंने कहा कि कार्यशाला से निकली कार्ययोजना को अमली जामा पहनाने के लिए विभिन्न विभागों को साथ में आना होगा। कार्यशाला में स्टेट रिसोर्स सेल के राज्य समन्वयक सैयद रिजवान अली ने बाल श्रम कानून के साथ साथ विभाग की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया कार्यशाला का संचालन असिस्टेंट लेबर कमिश्नर सिद्धार्थ मोदियानी द्वारा किया गया।कार्यशाला के दौरान यह भी बताया गया कि राज्य स्तर पर ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट और श्रम विभाग के बीच पाँच आकांक्षी जनपदों को 2026 तक बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए एक लिखित सहमति हुई है। इसी क्रम में ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट की सहयोगी संस्था रोजा संस्थान बहराइच में श्रम विभाग के साथ कार्य रही है। कार्यशाला के दौरान बच्चों की स्कूलों में उपस्थिति और नियमितता बनाने में शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा ग्राम स्तरीय बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति एवं ब्लॉक स्तरीय ग्राम एवं बाल कल्याण समिति को मजबूत कर बाल श्रम रोकने के लिए कार्य करना होगा। इस कार्यशाला में प्रथम संस्था, देहात इंडिया, अपराजिता, व्यापार मंडल, जनपद के विभागीय अधिकारी, व अन्य गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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