लंबी उठापटक के बीच हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम आखिरकार दिल्ली से केन्द्रीय नेतृत्व ने शनिवार को तय कर दिया है। चार बार से विधायक और कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू को हिमाचल प्रदेश का 15वां मुख्यमंत्री घोषित किया गया। इसके अलावा मौजूदा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे मुकेश अग्निहोत्री उप मुख्यमंत्री होंगे। वहीं, प्रतिभा सिंह मुख्यमंत्री पद की दौड़ से बाहर हो गईं और वह अभी प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार ही देखेंगी। रविवार को शिमला के रिज मैदान पर दोपहर 1:30 बजे शपथ ग्रहण समारोह होगा। अब जल्द मंत्रियों के नाम तय होंगे। उम्मीद है विक्रमादित्य को अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी
मुख्यमंत्री सुक्खू को राहुल गांधी का काफी करीबी माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक वह पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के आलोचक के रूप में भी जाने जाते रहे हैं। सुक्खू का नाम शुरू से ही मुख्यमंत्री पद की दौड़ में आगे चल रहा था। हालांकि, शुक्रवार को उन्होंने कहा था कि वह मुख्यमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं, लेकिन यह भी कहा था कि मुख्यमंत्री निर्वाचित विधायकों में से ही कोई होगा।
हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद प्रतिभा सिंह ने चुनावी नतीजों के बाद से ही परोक्ष रूप से खुद को मुख्यमंत्री के दावेदार के रूप में पेश कर दिया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी वीरभद्र सिंह के नाम, चेहरे और काम के बल पर चुनाव जीती है। शीर्ष नेतृत्व वीरभद्र के परिवार की अनदेखी नहीं कर सकता है। उनके समर्थकों ने शुक्रवार को शिमला में केंद्रीय पर्यवेक्षकों का घेराव भी किया था और प्रतिभा सिंह को मुख्यमंत्री बनाने को लेकर नारेबाजी कर दबाव बनाने की कोशिश की थी यही कोशिश उनके खिलाफ चली गई और पार्टी आलाकमान ने मुख्यमंत्री पद के लिए जिन तीन नामों पर विचार किया, उनमें प्रतिभा सिंह का नाम शामिल ही नहीं था ।
हरोली से कांग्रेस विधायक मुकेश अग्निहोत्री विधायक दल की बैठक छोड़कर बाहर चले गए। चौड़ा मैदान स्थित सिसिल होटल के बाहर प्रतिभा सिंह के पक्ष में समर्थक जमकर नारेबाजी करते रहे। समर्थकों को रोकना पुलिस के लिए मुश्किल हो गया था। प्रतिभा समर्थक हाईकमान होश में आओ, हॉलीलॉज सातवीं बार के नारे लगाते रहे। समर्थकों ने आरोप लगाया कि पहले सोची समझी साजिश के तहत प्रतिभा सिंह को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया। छह बार मुख्यमंत्री रहे दिवंगत वीरभद्र सिंह के नाम पर वोट लिए, अब अनदेखी की गई।
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