गोण्डा - लकड़कट्टों व वन कर्मियों की मिलीभगत से पंडरी कृपाल रेंज में प्रतिबंधित सागौन के पेड़ों की अवैध कटान का बड़ा मामला सामने आया है। सुरक्षा प्रभारी को जानकारी देने के बावजूद कार्रवाई न होने से विभागीय कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार दिनांक 14/15 जून 2026 को पंडरी कृपाल रेंज के सुमेरीपुर में अवैध रूप से सागौन के कई दर्जन पेड़ काटकर धराशायी कर दिए गए और मौके से गायब कर दिए गए। सुरक्षा प्रभारी अभिषेक वर्मा व अमित वर्मा को तत्काल सूचना दी गई लेकिन कार्रवाई शून्य रही।
झूठ और गोलमोल जवाब
दिनाँक 16.06.2026 को कार्रवाई की जानकारी लेने पर सुरक्षा प्रभारी ने बताया कि वनकर्मी सोनू शुक्ला ने थाना मोतीगंज में एफआईआर के लिए तहरीर दे दी है और "केश काट दिया गया है। जबकि मोतीगंज थाने में पता करने पर कोई तहरीर दर्ज नहीं मिली व वन विभाग में भी कोई केस दर्ज नहीं पाया गया। प्रकरण की जानकारी लेने पर रेंजर सुशांत शुक्ला ने कहा कि पेड़ कई लोगों के हिस्से में लगा था, सबका बयान लेकर कार्रवाई होगी, जबकि दिनाँक 20.6.2026 को सूचना मिली है कि सुमेरीपुर में जेसीबी द्वारा बूटों को खोदवाकर साक्ष्य मिटाया जा रहा है,जो जांच का विषय है।
वनकर्मी पर लगा झूंठ बोलने का आरोप
दिनाँक 19.06.2026 को पुनः जानकारी लेने पर सुरक्षा प्रभारी अभिषेक वर्मा ने बताया कि कटान की सूचना उसी समय वनकर्मी सोनू शुक्ला को दी थी, लेकिन सोनू शुक्ला ने झूठ बोलते हुए कहा "मैं मौके पर मौजूद हूं और बूटों की गिनती कर रहा हूं।
क्षेत्र में चर्चा
विदित हो कि 22.5.2026 को विद्यानगर में 15 पेड़ की परमिट होने के बावजूद सागौन के 33 पेड़ काटकर गायब कर दिए गए। मीडियाकर्मियों द्वारा खबर प्रकाशित किये जाने पर कुछ पर केश काटकर मामले को रफा दफा कर दिया गया परन्तु एफआईआर नही किया गया। चर्चा की मानें तो वन रक्षक सोनू शुक्ला के कार्यकाल में कई स्थानों पर प्रतिबंधित पेड़ अवैध रूप से काटकर गायब किए गए हैं, जिससे राजस्व को भारी नुकसान हुआ है। सोनू शुक्ला में सबसे बड़ी खासियत तो यह है कि उनके पास कुछ चिंदीचोर गुर्गे भी हैं जो खबर उजागर करनर वाले मीडियाकर्मियों को मोबाइल पर धमकाने में कोई कोर कसर नही छोड़ते। सबसे बड़ा प्रश्न यहां यह भी उठता है कि इनके कारनामों की जरा सी भी भनक रेंजर सुशांत शुक्ला को नही लगने पाती
स्थानीय लोगों की मांग
पर्यावरण संरक्षण और राजस्व हानि को देखते हुए मीडिया के माध्यम से स्थानीय लोगों द्वारा डीएफओ गोण्डा से अवैध कटान के सम्बंध में उच्चस्तरीय जांच और दोषी वनकर्मियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की जा रही है।
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