Jan 26, 2022

करनैलगंज : कौन होगा भाजपा का असली चेहरा ?

करनैलगंज/गोण्डा - जिले के करनैलगंज विधानसभा क्षेत्र से जहां समाजवादी पार्टी ने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है वहीं भाजपा को लेकर अभी यहाँ संशय की स्थिति बनी हुई है। आपको बता दें 2022 के होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए जहां पहली बाजी प्रत्याशी घोषित करने में समाजवादी पार्टी के हाथ लगी है, वहीं दूसरी ओर भाजपा में दो प्रबल दावेदारों के होने से अभी असमंजस की स्थिति बरकरार है। लोगों में चर्चाआम है की अंतत:  टिकट किसका फाइनल होगा, यहाँ से समाजवादी पार्टी ने अपने पुराने प्रत्याशी व सपा की सरकार में पूर्व मंत्री रहे योगेश प्रताप सिंह पर पुनः दांव लगाया है। वहीं भाजपा से 6 बार  विधायक कुंवर अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया के सुपुत्र कुँवर शारदेन मोहन प्रताप सिंह प्रबल दावेदारों में एक हैं, तो वहीं दूसरी तरफ बाहुबली सांसद, राष्ट्रीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष व भाजपा के कद्दावर नेता ब्रृजभूषण शरण सिंह के खेमे से परसपुर के ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि अजय सिंह की भी टिकट की दावेदारी भी हल्की नहीं मानी जा रही है। यहाँ आम जनमानस में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि भाजपा नेतृत्व किसके कद को बड़ा मानती है और टिकट किसके हाथ लगता है तथा चुनावी समीकरण किस करवट बैठता है, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। लेकिन जिस प्रकार समाजवादी पार्टी ने गोंडा की 3 सीटों  पर पिछली बार के उप विजेताओं को एक बार फिर मौका देने का काम किया है वहीं अब यह देखना है कि भाजपा पुनः अपने जीते हुए प्रत्याशियों पर दांव लगाती है या नए चेहरे को तरजीह देती है। वहीं करनैलगंज विधानसभा चुनाव को लेकर इस बार क्षेत्रवाद की हवा भी चरम पर दिख रही है क्योंकि वर्ष  80 के दशक से लेकर अभी तक विधायकी दो ही घरानों के बीच रही है। इस बार यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि  इस बार की विधायकी इसी दो घरानों के बीच रहती है या बाजी किसी तीसरे के हाथ लग सकती है। इस बात को लेकर कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि काफी कुछ भाजपा के टिकट वितरण पर निर्भर करता है। इससे यह साफ हो सकेगा इस चुनाव में जनता का रूख किसकी ओर है। वहीं अगर पड़ोसी कटरा बाजार विधानसभा की बात करें तो वहाँ भी भाजपा में बगावती सुर बहुत तेज हैं जहां वर्तमान विधायक बावन सिंह तीन बार भाजपा के विधायक रह चुके हैं पार्टी की अरसे से सेवा में जुटे हुये हैं।वहीं इस बार काफी समय से भाजपा में अपनी किस्मत टटोल रहे विनोद शुक्ला भी अपनी दावेदारी को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त दिख रहे है।जबकि यहां भी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के करीबी मने जा रहे कटरा बाजार ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि भवानी भीख शुक्ल भी टिकट के लिए हर तरह के प्रयास कर रहे हैं। कुल मिलाकर दोनों विधानसभा की स्थिति यह बनती जा रही है कि अगर यहां बगावती सुर शांत न हुए तो दोनों सीटों पर भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है यही स्थिति जिले के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी नजर आ रही है जिससे भाजपा संगठन को समझना पड़ेगा और आपसी तालमेल के जरिए सामंजस्य स्थापित कर किसी न किसी प्रकार बगावती सुर शांत करना फायदेमंद होगा। हालाकिं क्षेत्र की जनता को तय करना है कि वह अपने क्षेत्र की बागडोर किसके हाथ सौंपती हैं।

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