पारले कंपनी द्वारा शरदकालीन गन्ना बुवाई पर किसान जागरूकता गोष्ठी
वैज्ञानिक बुवाई से 500 क्विंटल प्रति एकड़ गन्ना उत्पादन का लक्ष्य
बदरौली/शरदकालीन गन्ना बुवाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पारले कंपनी के उप मुख्य गन्ना प्रबंधक संजीव राठी एवं गन्ना विभाग की टीम द्वारा क्षेत्र के ग्राम सभाओं में किसान जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में आज बदरौली में किसानों के साथ गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें शरदकालीन गन्ना बुवाई की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी गई।गोष्ठी को संबोधित करते हुए संजीव राठी ने किसानों से अधिक से अधिक क्षेत्रफल में शरदकालीन गन्ने की बुवाई करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वीकृत प्रजातियों—को-0118, को-14201, को-18231, को-16202, को-15466, को-94814 एवं को-98014—के शुद्ध, स्वस्थ और ताजा बीज की ही बुवाई करें, जिससे अच्छा जमाव एवं अधिक उत्पादन प्राप्त हो सके।राठी ने बताया कि फसल को रोग एवं कीट मुक्त रखने के लिए भूमि शोधन तथा बीज शोधन अनिवार्य रूप से करें। खेत की तैयारी के समय 2 बैग भूमृदा जैविक खाद, जो ट्राइकोडर्मा युक्त है, का प्रयोग करें। बीज शोधन हेतु इमिडा, हेक्सा टॉप एवं यूरिया को पानी में घोल बनाकर गन्ने के टुकड़ों का उपचार करें।उन्होंने किसानों को सलाह दी कि केवल 2 आंख वाले गन्ने के टुकड़ों की बुवाई करें, जिससे बीज की भारी बचत होगी। लाइन से लाइन की दूरी 4 फीट से कम न रखें। बुवाई के बाद टुकड़ों पर केवल 2 इंच मिट्टी डालें तथा सरावन न लगाएं।
बुवाई से पूर्व नालियों में प्रति एकड़ 2 बैग पारले ऑर्गनिक पोटाश, 25 किलो यूरिया, 75 किलो डी.ए.पी. तथा 10 किलो पारले गन्ना स्पेशल- माइक्रोन्यूट्रिएंट्स के प्रयोग की सलाह दी गई। संजीव राठी ने कहा कि वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान प्रति एकड़ 500 क्विंटल गन्ना उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसान तथा पारले कंपनी के अधिकारी गण दीपक श्रीवास्तव एवं सतीश सिंह मौजूद रहे।


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