Oct 14, 2026

डीएसआर से बहराइच में धान की पैदावार बढ़ी, किसानों को हर हेक्टेयर 25-30 हजार रुपये अतिरिक्त लाभ की संभावना

 डीएसआर से बहराइच में धान की पैदावार बढ़ी, किसानों को हर हेक्टेयर 25-30 हजार रुपये अतिरिक्त लाभ की संभावना

बहराइच। यूपीएग्रीज परियोजना के तहत जिला कृषि विभाग, यूपीडीएएसपी, अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) और सवाना सीड कंपनी के सहयोग से तेजवापुर विकासखंड के तेडवा बसंतापुर गांव में किसान जगजोत सिंह के धान के खेत में किसान खेत दिवस आयोजित हुआ। कार्यक्रम में लगभग 300 किसानों ने प्रत्यक्ष बीज बुवाई (DSR) तकनीक के लाभों की जानकारी ली।गांव में 9.2 हेक्टेयर में डीएसआर तकनीक से धान का क्लस्टर विकसित किया गया है। इसमें सवाना सीड कंपनी की किस्म सावा 7501 की बुवाई की गई। किसानों को बीज चयन, खरपतवार नियंत्रण और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन की जानकारी दी गई। अंकुरण से पूर्व पेंडीमेथालिन तथा खरपतवार निकलने के बाद बिसपाइरीबैक-सोडियम के उपयोग की सलाह दी गई।प्रदर्शन में डीएसआर तकनीक से 14 प्रतिशत नमी पर 8.6 टन प्रति हेक्टेयर धान की उपज दर्ज की गई, जबकि पिछले वर्ष पारंपरिक रोपाई से 4 से 5 टन प्रति हेक्टेयर उपज मिली थी। विशेषज्ञों ने बताया कि इस तकनीक से रोपाई के लिए मजदूरों की मांग और खेती की लागत घटती है। कम खर्च व अधिक पैदावार से किसानों को प्रति हेक्टेयर 25 से 30 हजार रुपये तक अतिरिक्त लाभ होने की संभावना है।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप कृषि निदेशक डॉ. विनय कुमार वर्मा ने किसानों से डीएसआर तकनीक अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ेगी, साथ ही मिट्टी व पर्यावरण का संरक्षण होगा। उन्होंने रासायनिक दवाओं के अनावश्यक प्रयोग से बचने और समेकित रोग प्रबंधन अपनाने पर जोर दिया।IRRI के क्लस्टर समन्वयक डॉ. विपिन कुमार अहलावत ने कहा कि डीएसआर से पानी व ईंधन की बचत, समय पर बुवाई और खरपतवार नियंत्रण संभव होता है। सवाना सीड कंपनी के जोनल सेल्स मैनेजर माल्या कुमार मिश्रा ने उपयुक्त किस्म चयन और अनुशंसित खेती पद्धति के महत्व पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर डॉ. विपिन कुमार अहलावत, डॉ. विपिन कुमार शर्मा, माल्या मिश्रा, राघवेंद्र तथा यूपीडीएएसपी के उप जिला परियोजना प्रबंधक राज किशोर सहित टीम उपस्थित रही। यह पहल जल-कुशल, जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ धान उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में मानी जा रही है।

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