लखनऊ - श्रावस्ती के इकौना में हुए कथित पुलिस एनकाउंटर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गंभीर सवाल उठाए हैं। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने मामले की CBI से स्वतंत्र जांच कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रथमदृष्टया FIR में दिया गया घटनाक्रम सही प्रतीत नहीं होता।
अदालत ने CBI निदेशक को 3 महीने में जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई *23 नवंबर 2026* को होगी।
जानिए क्या था पूरा मामला
यह मामला मई 2025 का है।
1. 9 मई: इकौना थाने में 7 साल की बच्ची को ले जाने के आरोप में FIR दर्ज हुई। इसमें शफीक और दो अज्ञात का नाम था।
2. 12 मई : तत्कालीन SHO अश्विनी कुमार दुबे ने दूसरी FIR दर्ज कराई। पुलिस का दावा था कि आरोपी *छोटकऊ उर्फ अलाउद्दीन* नेपाल भाग रहा था। अंधरपुरवा पुल के पास घेराबंदी में आरोपी ने फायरिंग की। जवाब में SHO ने 9 MM पिस्टल से 2 गोलियां चलाईं जो अलाउद्दीन के दोनों पैरों में लगीं। मौके से तमंचा बरामद करने का भी दावा किया गया।
लेकिन कोर्ट को पुलिस की इस कहानी पर भरोसा नहीं हुआ।
हाईकोर्ट ने उठाए ये बड़े सवाल
याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता नदीम मुर्तजा ने बहस की। कोर्ट ने FIR और पुलिस के दावों में कई विसंगतियां पाईं:
1. गिनती का गणित : FIR के मुताबिक 13 पुलिसकर्मी एक ही सरकारी वाहन में थे। फिर वही टीम 3 हिस्सों में कैसे बंट गई? बाद में SWAT समेत 23 पुलिसकर्मी मौके पर बताए गए, पर दूसरे वाहन का जिक्र नहीं।
2. 15 मीटर का निशाना: 23 पुलिसकर्मियों से घिरे आरोपी ने तमंचे से फायर किया, पर कोई पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ। वहीं SHO ने रात में 15 मीटर दूर से चलाई दोनों गोलियां सीधे आरोपी के दोनों पैरों में लगीं।
3. मेडिकल और हथियार: कोर्ट ने आरोपी की मेडिकल रिपोर्ट में दर्ज घावों और 9 MM गोली के आकार को लेकर SHO के जवाब को तर्कसंगत नहीं माना।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि "प्रथमदृष्टया प्रतीत होता है कि SHO ने FIR में सही घटनाक्रम नहीं बताया और कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की।"
कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि कथित एनकाउंटर में शामिल सभी 23 पुलिसकर्मियों को 'गुड वर्क' के लिए पुरस्कृत किया गया था।
आरोपी का पुराना कनेक्शन
अलाउद्दीन वही व्यक्ति है जिसे 2012 में 6 साल की बच्ची के रेप और हत्या केस में निचली अदालत और हाईकोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी। लेकिन *28 सितंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट* ने उसे बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने जांच और अभियोजन की गंभीर कमियों पर सवाल उठाए थे।
हाईकोर्ट ने संभावना जताई है कि सुप्रीम कोर्ट की इन्हीं टिप्पणियों के कारण पुलिस की आरोपी के प्रति नाराजगी हो सकती है।
CBI को क्या जांचना है?
13 अगस्त 2026 के आदेश में हाईकोर्ट ने CBI को FIR नंबर 113/2025 और कथित एनकाउंटर की सत्यता जांचने को कहा है।
CBI विशेष रूप से ये भी जांचेगी कि क्या SHO अश्विनी कुमार दुबे रात में 15 मीटर की दूरी से, सिर्फ हथियार लोड होने की आवाज सुनकर, 9 MM पिस्टल से सटीक निशाना लगा सकते थे?
साथ ही कोर्ट ने श्रावस्ती के एडिशनल सेशंस जज के 2 जुलाई 2026 के उस आदेश पर भी रोक लगा दी है जिसमें अलाउद्दीन की डिस्चार्ज अर्जी खारिज की गई थी। ममामले में अब राज्य सरकार को 3 महीने में जवाबी हलफनामा देना है।
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