Apr 10, 2026

हाईकोर्ट के पास ‘टारगेट चालान’ का आरोप: दलालों के जरिए वसूली न देने पर कॉमर्शियल वाहनों पर कार्रवाई



लखनऊ - माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ के पास यातायात व्यवस्था को लेकर एक गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि खंडपीठ से महज 300 गज की दूरी पर स्थित चौराहे पर वैध रूप से संचालित कॉमर्शियल वाहनों को कथित रूप से निशाना बनाकर चालान किया जा रहा है।
पीड़ित वाहन चालकों का कहना है कि संबंधित स्थान पर कई बार वाहन का 80 प्रतिशत हिस्सा व्हाइट स्ट्रिप के भीतर होने के बावजूद, और आसपास किसी प्रकार का ट्रैफिक, भीड़, पुलिस कर्मी या अवरोध न होने के बावजूद भी चालान काटे जा रहे हैं। चालकों का आरोप है कि यह कार्रवाई नियमों के पालन के बजाय “टारगेट” बनाकर की जा रही है।

दलालों के जरिए वसूली का आरोप

चालकों ने यह भी आरोप लगाया है कि चौराहे पर कथित रूप से कुछ दलाल सक्रिय हैं, जो प्रतिदिन वसूली करते हैं। यदि कोई चालक यह रकम देने से इनकार करता है, तो उसके वाहन को चिन्हित कर लिया जाता है और बाद में उस पर ₹500, ₹1000 से लेकर ₹1500 तक के चालान काटे जाते हैं।

सीज और लाइसेंस निरस्तीकरण तक की कार्रवाई

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। आरोप है कि कई मामलों में वाहनों को सीज करने के साथ-साथ ड्राइवर के वैध ड्राइविंग लाइसेंस को निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाती है, जिससे वाहन चालकों में भारी आक्रोश है।

वाहन चालकों में रोष, निष्पक्ष जांच की मांग

स्थानीय कॉमर्शियल वाहन चालकों ने इस पूरे प्रकरण को “अत्याचारपूर्ण और कदाशयपूर्ण” बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन होता है तो कार्रवाई उचित है, लेकिन बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार चालान करना न्यायसंगत नहीं है। चालकों ने प्रशासन और यातायात विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आम जनता और वाहन चालकों का विश्वास बना रहे।

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