आर के मिश्रा
परसपुर गोण्डा।। क्षेत्र के हरेक घरों में मंगलवार को नाग पंचमी के अवसर पर महिलाओं ने नाग नागिन का विधि विधान पूर्वक पूजन किया। नाग पंचमी के अवसर पर महिलाओं ने गूंथे आटा से सर्प का प्रतीक बनाया। फिर उबला चना, दूर्वा, दूध, कुशा, अक्षत्, फूल, धूप नैवेद्य आदि से नाग पूजा किया। नाग देवता को दूध से स्नान कराकर भोजन कराया। नाग पंचमी को नागों की पूजा करने से नाग देवता भगवान शिव और श्री हरि विष्णु प्रसन्न होते हैं। सावन माह के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को नाग पंचमी पर शिव योग, सिद्ध योग और रवि योग समेत तीन शुभ योग रहे हैं।
नाग पंचमी का पर्व के अवसर पर दिन मंगलवार को महिलाओं ने घरों में व्यंजन तैयार किया। और गाँव के बाहर बाग बगीचों में विधिविधान पूर्वक नाग नागिन का पूजा किया। बताया जा रहा है कि नाग पंचमी के अवसर पर नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। इस दिन नागों की पूजा करने से उनसे होने वाले भय दूर होते हैं। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष है, तो वह नाग पंचमी के दिन इससे मुक्ति पाने के लिए ज्योतिष उपाय कर सकता है। हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है। इस बारे में पंडित त्यागा नन्द पाण्डेय का कहना है कि मंगलवार की सुबह 05 बजकर 13 मिनट से नाग पंचमी तिथि प्रारंभ हुई है। बुधवार की सुबह 05 बजकर 41 मिनट पर इसका समापन होगा। मंगलवार को प्रातः से शाम 06 बजकर 38 मिनट तक शिव योग एवं शाम 06 बजकर 38 मिनट से कल, शाम 05 बजकर 49 मिनट तक सिद्ध योग तथा शाम 05 बजकर 29 मिनट से बुधवार सुबह 05 बजकर 43 मिनट तक रवि योग मुहूर्त है।
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