Apr 2, 2026

कटरा बाजार : कमीशनखोरी के जाल में फंसी मातृत्व सेवाएं, आशा कार्यकत्रियों पर गंभीर आरोप

गोण्डा - क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप है कि कुछ आशा कार्यकत्रियां कमीशन के लालच में प्रसूताओं को सरकारी अस्पतालों के बजाय निजी अस्पतालों में ले जाकर प्रसव करवा रही हैं, जिससे गरीब परिवारों का आर्थिक शोषण हो रहा है।
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को बहला-फुसलाकर एक निजी अस्पताल “न्यू लाइफ” में भर्ती कराया जा रहा है। इसके पीछे मोटे कमीशन का खेल बताया जा रहा है। वहीं, सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली मुफ्त या सस्ती सुविधाओं को नजरअंदाज कर मरीजों से हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं। मौके पर की गई पड़ताल में ग्राम पंचायत नकहा की आशा कार्यकत्री पूनम पाण्डेय कथित रूप से अस्पताल परिसर में सक्रिय पाई गईं। इससे पूरे मामले को और बल मिला है। जब इस संबंध में जानकारी जुटाने की कोशिश की गई, तो संबंधित आशा कार्यकत्री द्वारा पत्रकार से अभद्र टिप्पणी करते हुए कहा गया कि “फोटो खींचना नीच काम है”, जो न सिर्फ गैर-पेशेवर रवैया दर्शाता है बल्कि पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा करता है। इस पूरे प्रकरण की सूचना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कटरा बाजार की अधीक्षिका को दे दी गई है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर मामले को कितनी प्राथमिकता से लेता है और क्या निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती है।
ऐसे में बड़ा गंभीर सवाल है कि क्या मातृत्व जैसी संवेदनशील सेवा भी अब कमीशनखोरी की भेंट चढ़ चुकी है? क्या गरीबों के हक की सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई हैं? यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न सिर्फ चिकित्सा नैतिकता का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी योजनाओं के साथ खुला खिलवाड़ भी है। ऐसे में जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लग सके और आम जनता का भरोसा बहाल हो।

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