करनैलगंज/गोण्डा - स्थानीय तहसील क्षेत्र के नारायणपुर साल गांव में डा.हनुमान प्रसाद दुबे के यहाँ आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस पर आचार्य पं.बैद्यनाथ नाथ त्रिपाठी ने सृष्टि की उत्पत्ति और त्रिविध ताप तथा उसके निवारण का उपाय बताते हुए बताया कि सच्चिदानंद स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण ,जो जगत की उत्पत्ति स्थिति और विनाश हेतु आध्यात्मिक, आधिभौतिक,आधिदैविक तीनों प्रकार के ताप को नाश करने वाले हैं ।
श्रीमद्भागवत महापुराण के विषय में प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह महापुराण सामान्य ग्रन्थ नहीं अपितु नारायण का साक्षात श्लोक- काव्य मय स्वरूप है ,इस अद्भुत ग्रन्थ के एक - एक शब्द में श्रीकृष्ण जी व्याप्त हैं। ज्ञान,वैराग्य,भक्ति की त्रिवेणी इसमें सरस प्रवाहित होती हैं। जो भी इसका श्रवण ,मनन करता है वह त्रिविध ताप से मुक्त हो जाता है। कथा में भगवान व्यास के विरह निवारण का आख्यान का वर्णन करते हुए बताया कि जब व्यासजी के पुत्र स्वामी सुखदेव को सन्यास लेने के लिए घर से जाते हुए देखकर पिता व्यास विरह से पीड़ित हो कातर होकर पुकारने लगे ,बेटा - बेटा कह कर पुकारने लगे और कहने लगे कहाँ जा रहे हो? इस पर वृक्षों ने तन्मय होकर स्वामी सुखदेव की ओर से उत्तर दिया , आपका ज्ञान अन्धकार को नष्ट करने के लिए करोड़ों सूर्यों के समान है अतः आपको सामान्य जनों की तरह विलाप शोभनीय नहीं है।आगे प्रसंग में वर्णन करते हुए कहा कि नारदजी ने बार - बार ज्ञान-वैराग्य, भक्ति का उपदेश किया परन्तु शोक का शमन न होने पर नारद स्वामी ने श्रीकृष्ण का ज्ञान रूपी सप्ताह यज्ञ का अनुष्ठान करके मोक्ष प्राप्त कराया अर्थात माया के भ्रमजाल को विक्षिन्न कर सत्य स्वरूप परमात्मा का बोध कराकर मोक्ष अर्थात मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया। कथा में भारी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।


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