कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान कालानमक धान की उत्पादकता एवं सुगन्ध बढाने के लिए निरन्तर नए शोध कर अधिक उत्पादन देने वाली झुलसा रोग अवरोधी प्रजातियां विकसित कर रहा है। यह नवीनतम प्रजातियां पूर्वांचल के जनपदों के लिए कितनी उपयुक्त है, इसी उद्देश्य से बस्ती, सन्तकबीर नगर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बलरामपुर, श्रावस्ती, गोण्डा और बहराइच के 11 केन्द्रों पर कालानमक धान का ट्रायल लगाया गया है। पूर्व वर्षों में लगे ट्रायलों से पूसा 1638 एवं एसएल-03 का चयन किया गया है, जो कालानमक उत्पादन वाले जनपदों में 40-45 कुंतल प्रति हेक्टेयर उत्पादन भी दे रही हैं। बस्ती जनपद के कालानमक धान की ख्याति पूरे भारत में फैल गई है। उम्मीद है कि भविष्य में इसके उत्पादन क्षेत्र में वृद्धि होगी।
मण्डलायुक्त गोविन्द राजू एनएस ने कहा कि कालानमक धान बस्ती की पहचान बन गया है। इसे एक जनपद एक उत्पाद में शामिल किया गया है। कृषि विज्ञान केन्द्र पर आईएआरआई के सहयोग से विभिन्न प्रजातियों के जो ट्रायल लगाए गए हैं, वह जैव विविधता का एक अच्छा माडल है, जिसे देखकर किसान अपनी मिट्टी के अनुसार उन्नतिशील प्रजाति का चयन कर सकते हैं। कालानमक धान एवं केन्द्र की अन्य गतिविधियों के प्रचार प्रसार में जिला प्रशासन पूरा सहयोग करेगा।
इस दौरान पूर्व कृषि निदेशक डॉ. ओपी सिंह, वैज्ञानिक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद डॉ. हरिथा, केन्द्राध्यक्ष प्रो. एसएन सिंह, प्रगतिशील कृषक परमानन्द सिंह, अरविन्द सिंह, राममूर्ति मिश्र, अमित मोहन त्रिपाठी, अरविन्द पाल, आज्ञाराम वर्मा, दिनेश वर्मा, योगेन्द्र सिंह, विजेन्द्र पाल, डॉ. प्रेम शंकर, डॉ. अंजलि वर्मा, डॉ. वीबी सिंह, डॉ. डीके श्रीवास्तव, हरिओम मिश्र और जेपी शुक्ल आदि मौजूद रहे।
रुधौली बस्ती से अजय पांडे की रिपोर्ट
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