गोरखपुर में मां ने अपने छोटे बेटे के साथ आत्महत्या कर लिया। संभवतः इसकी वजह धोखा था। क्योंकि बड़े बेटे ने अपनी मां के बैंक अकाउंट से 69 लाख रुपए चुपके से निकाल लिया था। अब वो अपनी पत्नी के साथ घर छोड़कर अलग रहने लगा था। मां के पास ये रुपए अपना मकान बेचने के बाद आए थे। इस वजह उनपर मकान के खरीदारों का भी दबाव था। एक तरह से वो अपने ही मकान में किराएदार की तरह गुजर बसर कर रही थीं।
जन प्रिय विहार कॉलोनी में पुलिस ने मंगलवार देर रात 11.30 बजे सुसाइड होने के बाद दोनों लाशों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है। अब बड़े बेटे से पूछताछ की जाएगी। अभी तक घर से कोई सुसाइड नोट मिलने की जानकारी नहीं मिली है।
जनप्रिय विहार कॉलोनी में मां-बेटे के जहर खाने के बाद दोनों को जिला अस्पताल लाया गया था। स्थिति बेकाबू होने के बाद उन्हें डॉक्टरों ने BRD मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान मेडिकल कॉलेज में दोनों की मौत हो गई।
बेटे के साथ ज्वाइंट अकाउंट में रखे थे रुपए जनप्रिय बिहार इलाके के LIG-100 में सरोज देवी अपने बड़े बेटे श्रीश राव और छोटे बेटे मनीष राव के साथ रहती थी। सरोज ने छह माह पूर्व जनप्रिय विहार के मकान को 69 लाख में बेच दिया। धनराशि को मां और बड़े बेटे के संयुक्त खाते में रखा गया था।
बेटे ने खाता को सिंगल करवाया, फिर रकम निकाली मोहल्ले वालों के मुताबिक, बड़े बेटे ने चुपके से खाते को सिंगल अकाउंट को सिंगल करवाने के साथ रकम निकाल कर अलग जगह मकान खरीद लिया। इसकी जानकारी होने पर मां नाराज हुई तो वह 10 नंबर को पत्नी के साथ ससुराल में जाकर रहने लगा। इस बीच कई बार मां ने छोटे बेटे के लिए रुपए की मांग की, मगर बड़े बेटे ने रुपए देने से इनकार कर दिया। मंगलवार को भी मां ने बेटे श्रीश को फोन करके रुपए मांगे, लेकिन उसने पैसे देने से मना कर दिया। आरोप है की श्रीश के व्यवहार से आहत मां और बेटे ने मंगलवार देर रात जहर खा लिया। घटना की सूचना मिलने के बाद गोरखनाथ पुलिस में शव को कब्जे में ले लिया है। अपने मकान में ही किराएदार बनकर रह गए थे दोनों करीब 6 महीने पहले जब सरोज देवी ने अपना मकान बेचा था तो खरीदने वाले ने उन्हें रहने की व्यवस्था ना होने तक उसी घर में रहने की अनुमति दे दी थी। लिहाजा वह पिछले छह माह से अपने ही मकान में किराएदार बनकर रह रही थीं। वहीं छोटा बेटा मनीष गोडधोइया नाले के पास कार वॉशिंग सेंटर चलाता था।
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