गोण्डा - योगी सरकार किसानों को मुफ्त पानी देने का दावा करती है, लेकिन गोण्डा जिले के इटियाथोक ब्लॉक में इस दावे की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहां का एक सरकारी नलकूप सिस्टम की लापरवाही का जीता-जागता नमूना बन गया है। मामला विकास खंड इटियाथोक के ग्राम विशुनपुर संगम में स्थित नलकूप संख्या-1760 का है।
मौके पर मिली बदहाली की तस्वीर
मौके पर पहुंचने पर नलकूप का पंप हाउस खंडहर में तब्दील मिला। पंप हाउस के दोनों दरवाजे 24 घंटे खुले रहते हैं। अंदर की तस्वीर सबसे ज्यादा शर्मनाक है। फर्श पर गोबर, गुटखा-बीड़ी के खाली पाउच, सूखे पत्ते और कचरे का अंबार लगा है। बिजली के बोर्ड खुले पड़े हैं और तार झूल रहे हैं। लाखों रुपये की मोटर जंग खा रही है और चोरी का भी खतरा बना हुआ है।
ग्रामीण बोले- किसान रोए, ऑपरेटर सोए
ग्रामीणों का आरोप है कि इस नलकूप पर तैनात सरकारी ऑपरेटर महीनों से ड्यूटी पर नहीं आ रहा है। किसान सुबह-शाम चक्कर लगाते हैं, लेकिन ऑपरेटर का कोई अता-पता नहीं रहता।
बोर्ड पर नंबर, फोन कोई नहीं उठाता
पंप हाउस की दीवार पर अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और विद्युत हेल्पलाइन 1912 तक के नंबर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखे हैं, लेकिन किसानों का कहना है कि इन नंबरों पर फोन करने पर कोई जवाब नहीं मिलता। ऐसे में किसान शिकायत लेकर कहां जाएं।
100 बीघा फसल पर संकट
स्थानीय किसानों के अनुसार, इस एक नलकूप से 100 से अधिक किसानों की करीब 100 बीघा खेती की सिंचाई होती है। इस समय गेहूं और सरसों की बुवाई का समय है, लेकिन नलकूप पर ऑपरेटर न होने से उन्हें मजबूरी में 300 रुपये प्रति घंटा की दर से निजी बोरिंग से पानी लेना पड़ रहा है। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
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