Jul 21, 2026

साहित्यिक संस्था बज्मे शामे गजल की कब्यगोष्ठी संपन्न

करनैलगंज /गोण्डा - साहित्यिक संस्था 'बज़्मे शामे ग़ज़ल' की मनक़बती शेरी नशिस्त (काव्य गोष्ठी) हाजी यासीन मंज़िल मोहल्ला बालूगंज में आयोजित हुई । अब्दुल गफ्फार ठेकेदार व गणेश तिवारी 'नेश' के संरक्षण में गोष्ठी की अध्यक्षता हाजी ज़हीर वार्सी ने किया । बतौर अतिथि शेख शम्स (इंक़लाब ब्यूरो) व जावेद अंसारी (गोण्डा) कार्यक्रम में शामिल हुए । आग़ाज़ लईकुर्रहमान की तिलावते कुरआन से हुआ व इरफान मसऊदी ने नात पेश की । संचालन करते हुए याकूब सिद्दीक़ी 'अज़्म' ने शोक प्रस्ताव प्रस्तुत किया । जिस के तहत मस्जिद बेचान बालूगंज के इमाम क़ारी रईस क़ादरी के पिता श्री मु० यासीन अंसारी, चिकित्सा शिक्षा से जुड़े शाए़र डा० रिजवानुर्रज़ा अलीग के पिता जी मौलाना बरकत अली क़ादरी (सिद्धार्थनगर) एवं क्रिश्चियन कालेज लखनऊ से सेवानिवृत्त उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो० अहमद अब्बास रुदौलवी  के निधन पर संस्था की ओर से शोक व्यक्त किया गया । महामन्त्री मुजीब सिद्दीक़ी ने हज़रत इमाम हुसैन व कर्बला के शहीदों को नमन करते हुए कहा उनकी अज़ीम कुर्बानी अन्याय के ख़िलाफ व इन्सानियत के लिए थी । यही कर्बला का पैग़ाम है ।
    मु० मुबीन मंसूरी ने कर्बला को समर्पित किया -
ऐ कर्बो बला अपनी क़िस्मत पे तू नाज़ां हो - दामन में तेरे वो है, जन्नत का जो सुल्तां है।
कौसर सलमानी ने कहा - 
छोड़ कर हम उनका दर भटके  हैं कौसर दर बदर - मंज़िलें मिलती हैं जिनके नक़्शे पा से आज भी ।
साबिर अली गुड्डू ने तुलना करते हुए कहा - कर्बला में बे कफ़न थे, अब दिलों में हैं हुसैन - वो भी मंज़र देखिए और ये भी मंज़र देखिए ।
मास्टर अल़ीम जरवली ने इमाम हुसैन के हवाले से कहा - 
हिन्दू, मुस्लिम, सिख व ईसाई सभी मद्दाह हैं - किस क़दर फैला हुआ है दायरा शब्बीर का । 
हस्सान जलाल पुरी ने हज़रत अली असग़र को समर्पित किया -
इक निगाहों से लड़ा है, इक तबस्सुम से लड़ा - बे ज़बां में भी हुनर अब्बास का देखा गया ।
हाफिज़ निज़ामुद्दीन 'शम्स' ने मशवरा दिया - 
चाहतें हैं आप गर रौशन रहे फ़िक्रो नज़र - कर्बला की ख़ाक आंखों में लगाकर देखिए ।
यासीन अंसारी 'राजू' ने आवाहन किया - 
हुसैन इब्ने अली के चाहने वालो चले आओ - लगा है शामियाना हश्र में ज़हरा की चादर का ।
इमरान मसऊदी ने हज़रत हसन व हुसैन की अज़म़त पर कहा -
बस यही दो आईने हैं, तीसरा कोई नहीं - जलवये हसनैन में हुस्ने पयम्बर देखिए ।
    साथ ही मुजीब सिद्दीक़ी, ताज मो० कुरबान, नियाज़ क़मर, सग़ीर सिद्दीक़ी, याकूब 'अज़्म', सलीम बेदिल, अभिषेक श्रीवास्तव व मेराज अनवर ने कलाम पेश किये ।
    मेज़बान सग़ीर सिद्दीक़ी ने धन्यवाद ज्ञापित किया ।
    इस अवसर पर मास्टर रज़ा, कय्यूम सिद्दीक़ी, हरीश शुक्ल, इदरीस, अब्दुल खालिक़, आज़म खां, आशिक रसूल, रहबर हुसैन खां, शकील अहमद, इरशाद छोटकऊ, खुर्शीद आलम, शब्बू सिद्दीक़ी, मास्टर इक़बाल, सग़ीर कुरैशी, जीशान अंसारी, आज़ाद आरिफी, आदिल असलम, नसीम रौशन, युसूफ खां, अता मु० राईनी, मेराजुद्दीन, जाफर, राजा कुरैशी, इमरान, काशिफ आदि मौजूद रहे ।

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