Feb 22, 2026

साहित्यिक संस्था बज्मे शामे गजल की काव्य गोष्ठी सम्पन्न

करनैलगंज /गोण्डा - साहित्यिक संस्था 'बज़्मे शामे ग़ज़ल' की तरही नशिस्त (काव्य-गोष्ठी) शाह नवाज़ मुन्ना हाशमी के मकान पर मो० सकरौरा में आयोजित हुई । गणेश तिवारी 'नेश' व अब्दुल गफ्फार ठेकेदार के संरक्षण में गोष्ठी की अध्यक्षता मुजीब अहमद सिद्दीक़ी ने की व संचालन याकूब सिद्दीक़ी 'अज़्म' ने किया । शोक प्रस्ताव के तहत संरक्षक अब्दुल गफ्फार ठेकेदार के बड़े बहनोई व अल्ताफ हुसैन राईनी के फूफा शेख अब्दुल जब्बार साहब (लाटूश रोड - लखनऊ) तथा शाए़र रईस सिद्दीक़ी बहराइची की माता जी के निधन पर शोक व्यक्त किया गया । आग़ाज़ में मु० मुबीन मंसूरी व हाफिज़ निज़ामुद्दीन 'शम्स' ने तरही नात पेश की । शाए़रों ने मिसरा तरह " ये ह़क है तुम्हें हासिल जो चाहे सज़ा देना " पर कलाम पेश किये । 
       अध्यक्षता कर रहे मुजीब सिद्दीक़ी ने कहा - 
हक़ गो भी हमेशा थे, वो भी थे जो कहते थे - हक़ बोलने वालों को सूली पे चढ़ा देना ।
नियाज़ अहमद 'क़मर' ने यह पैगाम दिया - 
नफ़रत की अगर बातें होती हैं तो होने दो - पैग़ामे मुहब्बत ही लोगों को सदा देना ।
मु० मुबीन मंसूरी ने ज़ोर देकर कहा - 
एहसान कोई माने या मुझको बुरा समझे - है काम फक़त मेरा आईना दिखा देना ‌।
नजमी कमाल गोण्डवी ने ईद के हवाले से कहा - 
अहबाब से जब मिलना तुम ईद तो ऐ 'नजमी' - यह शिकवे गिले सारे, फिर दिल से भुला देना ।
रशीद माचिस ने आगाह किया -
 हमदर्द हैं कुछ ऐसे उन पर भी नज़र रखना - यह काम है भाई को भाई से लड़ा देना ।
निज़ामुद्दीन 'शम्स' ने प्रेम व एकता का संदेश दिया - 
तुम ईद और होली में आपस में गले मिल कर - यह शेख व बरहमन की तफरीक़ मिटा देना ।
यासीन राजू अंसारी ने यह विशेषता बताई - 
उस पैकरे ख़ूबी में इक और सिफत भी है - रोतों को हंसा देना , हंसतों को रुला देना ।
अभिषेक श्रीवास्तव ने भविष्य के लिए दुआ की - 
लफ़्ज़ों में मुहब्बत हो, सांसों में हो आज़ादी - नस्लों को खुदाया बस ऐसी ही फ़ज़ा देना ।
इमरान मसऊदी ने महबूब से कहा - क्या मेरी ख़तायें हैं पहले ये बता देना - फिर हक़ है तुम्हें हासिल जो चाहे सज़ा देना ।
अलहाज गोण्डवी ने ख़ुदा से कहा - 
फिर नाम तेरा लेकर मंझधार में उतरा हूं - या रब मेरी कश्ती को साहिल से लगा देना ।
      साथ ही ताज मुहम्मद कुरबान, एम. याकूब 'अज़्म' , सलीम बेदिल व अलीम जरवली  ने कलाम पेश किये । मकसूद बेग 'रहबर' (मस्क़त) का कलाम भी पढ़ा गया । इस अवसर पर अब्दुल कय्यूम सिद्दीक़ी, हरीश शुक्ल , हाफिज़ हिसामुद्दीन , आशिक रसूल , खुर्शीद आलम , मास्टर एम. इक़बाल , सोनू श्रीवास्तव , इखलाक वारिस , आदिल असलम खां , मेराजुद्दीन व अशरफ सिद्दीक़ी आदि मौजूद रहे । मुजीब सिद्दीक़ी के अध्यक्षीय वक्तव्य पर गोष्ठी सम्पन्न हुई ।

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