गोण्डा (Gonda) -
शनिवार को महाराणा प्रताप के जयंती के अवसर पर मॉडर्न पब्लिक स्कूल पटेल नगर गोंडा में कोविड - 19 कोरॉना वैश्विक महामारी को देखते हुए सोशल डिस्टेंस अपनाकर एक छोटी सी संगोष्ठी का आयोजन किया गया सगोष्ठी का शुभारंभ महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके विचारों के बारे में चर्चा हुई। जिसमें पूर्व प्रोफेसर /प्रबंधक मॉडर्न पब्लिक स्कूल के डॉ शेर बहादुर सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा किमहाराणा प्रताप भारत के एक सच्चे वीर सपूत और महापराक्रमी योद्धा थे, जिनकी वीरता की गाथा इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखी गई है। महाराणा प्रताप की जीवन गाथा शौर्य, साहस, स्वाभिमान, पराक्रम एवं राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है।
संयुक्त पेंशनर कल्याण समिति उत्तर प्रदेश गोंडा के मंत्री केबी सिंह ने कहा कि महाराणा प्रतापएक सच्चे और आदर्श शासक की तरह अपनी प्रजा को अपने परिवार से भी ज्यादा मानते थे और आखिरी सांस तक वे अपनी प्रजा की रक्षा के लिए लड़ते रहे। उनके अद्भुत साहस, वीरता और पराक्रम की प्रशंसा तो मुगल बादशाह अकबर द्धारा भी की गई थी।
भाजपा नेत्री श्रीमती सोनी सिंह ने कहा कि कम सैनिक और युद्ध हथियार कम होने के बाबजूद भी महाराणा प्रताप ने मुगलों के साथ हुए हल्दी घाटी के युद्ध में मुगलों को छटी का दूध याद दिला दिया था । पूर्व सीएमओ विजय शंकर सिंह ने कहा कि महापराक्रमी और वीर योद्धा महाराणा प्रताप न सिर्फ युद्ध कौशल में निपुण थे, बल्कि वे एक भावुक एवं धर्मपरायण योद्धा भी थे। महाराणा प्रताप की शौर्यगाथा, हर भारतीय को गौरान्वित करती है।
चित्रांश कल्याण परिषद के अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि महाराणा प्रताप सिंह का जन्म 9 मई 1540, कुम्भलगढ़ दुर्ग राजस्थान, में हुआ था पिता का नाम राणा उदय सिंह माता महारानी जयवंताबाई था घोड़ा चेतक था उनका चेतक इतना वीर और शक्तिशाली था कि आज भी स्कूल के बच्चों को चेतक की वीरता रण बीच चोकड़ी भर-भर कर चेतक बन गया निराला था राणाप्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा का पाला था पढ़ाया जाता है महाराणा प्रताप की मृत्यु 29 जनवरी 1597 उम्र 57 हो गई थी।
पूर्व प्रोफेसर डॉक्टर बी पी सिंह ने कहा कि ऐसा कहा जाता है कि महाराणा प्रताप का पालन-पोषण भीलों की कूका जाति ने किया था, इसलिए बचपन में उन्हें कीका कहकर बुलाया जाता था। महाराणा प्रताप, बचपन से ही आसाधारण प्रतिभा वाले बालक थे, उनके दृढ़निश्चयी और स्वाभिमानी स्वभाव को देखकर, उनके बचपन से ही उनके पराक्रम और अद्भुत शक्ति के कयास लगाए जाते थे।
लेक्चरर डॉक्टर बीनू सिंह ने महाराणा प्रताप के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शुरु से ही वे हठी स्वभाव के थे, जो किसी के काबू में नहीं आते थे और स्वतंत्र रहना पसंद करते थे। आगे चलकर भी, परमवीर महाराणा प्रताप ने अपनी जिंदगी में मुगल शासकों के सामने घुटने नहीं टेके , और पराधीनता स्वीकार नहीं की , साथ ही मुगलों को अपनी अद्मय शक्ति दिखाकर उनके मन में अपने प्रति खौफ पैदा कर दिया था। महाराणा प्रताप अकेले ही कई मुगलों पर भारी थे। मुगल सम्राट, अकबर भी महाराणा प्रताप के शौर्य, साहस, पराक्रम एवं अद्भुत शक्ति का कायल था। महाराणा प्रताप के अमर सिंह और भगवान दास के नाम की दो पुत्र थे। बाद में महाराणा प्रताप के पुत्र अमर सिंह ने ही राजगद्दी संभाली थी।
रामशरण सिंह ने कहा किमहाराणा प्रताप एक ऐसे वीर और स्वाभिमानी शासक थे, जिन्होंने मुगलों की अधीनता को अस्वीकार कर दिया था। इसलिए अकबर ने 1576 महाराणा प्रताप के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। बाद में यह हल्दी घाटी के युद्ध के नाम से जाना जाता हैं। इस संगोष्ठी में वीर गौरव सिंह , बीनू सिंह ,गीता सिंह, पूर्व मुख्यचिकित्साधिकारी विजय शंकर सिंह, नेशनल प्लेयर दीपांशु सिंह, एन बी सिंह, दिलीप सिंह आदि संभ्रांत लोग मौजूद थे।



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