Feb 9, 2026

43 साल पुराने वादों को दबाने और सिस्टम से छेड़छाड़ का आरोप





बिना आदेश पोर्टल पर फर्जीवाड़ा, प्रशासन ने दिखाई कठोरता

गोण्डा - जनपद गोण्डा में न्यायिक कार्यप्रणाली को प्रभावित करने वाली गंभीर अनियमितताओं पर जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए उपजिलाधिकारी (न्यायिक) तरबगंज न्यायालय में तैनात रीडर राजेश कुमार पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायिक व्यवस्था में लापरवाही, मनमानी और सिस्टम से छेड़छाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जिलाधिकारी ने बताया कि निलंबित कर्मचारी द्वारा 43 वर्ष पुराने वादों को जानबूझकर लंबित रखा गया, जिससे शासन स्तर पर जनपद की छवि धूमिल हुई। इसके साथ ही वर्ष 1982 में निस्तारित वादों के विरुद्ध प्रस्तुत बाजदायर एवं विलंब माफी प्रार्थना-पत्रों को बिना पीठासीन अधिकारी के किसी वैध आदेश के पोर्टल पर मूल वाद के रूप में दर्ज कर दिया गया। परिणामस्वरूप ये प्रकरण पोर्टल पर सबसे पुराने वादों की सूची में प्रदर्शित होने लगे, जो गंभीर प्रशासनिक और न्यायिक गड़बड़ी को दर्शाता है।

जांच में यह भी उजागर हुआ कि संबंधित पत्रावलियों में न तो आर्डर शीट उपलब्ध थी और न ही कभी प्रकरण पीठासीन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। बिना सक्षम आदेश के पोर्टल पर वाद फीड कर तिथियां तय की जाती रहीं। न्यायालयी अभिलेखों के रख-रखाव, पोर्टल अपडेट और न्यायिक कार्यों में की गई घोर लापरवाही के कारण वादों के निस्तारण में अपेक्षित प्रगति पूरी तरह बाधित रही। प्रशासन ने इसे न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने का गंभीर प्रयास माना है।

आदेश में यह भी उल्लेख है कि रीडर द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य किया गया, जिससे उनकी सत्यनिष्ठा पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। निलंबन अवधि में संबंधित कर्मचारी को वित्तीय हस्त पुस्तिका के प्रावधानों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा, बशर्ते वह किसी अन्य सेवायोजन, व्यापार या व्यवसाय में संलग्न न होने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करे। विभागीय जांच के लिए अपर उपजिलाधिकारी द्वितीय को जांच अधिकारी नामित किया गया है।

प्रशासन ने दो टूक कहा है कि न्यायिक कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है, और किसी भी स्तर की लापरवाही पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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