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Oct 11, 2022

नेताजी की दरियादिली के कायल हो गए थे शिक्षक, चीफ सेक्रेटरी मना करती रहीं; फिर भी मुलायम ने कर दिया ये ऐलान

धरतीपुत्र मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद हर कोई उनके बेबाक अंदाज और साफगोई को याद कर रहा है। शिक्षकों के दिलोदिमाग पर 2004 में एमपी इंटर कॉलेज गोरखपुर का वाकया आज भी तरोताजा है। जब तत्कालीन मुख्य सचिव मंच पर सीएम मुलायम सिंह यादव को शिक्षकों के मांग को नहीं मानने का इशारा करती रहीं, और उन्होंने यूपी बोर्ड में भी सीबीएसई के बराबर कॉपियों के मूल्याकंन के पारिश्रमिक की घोषणा कर दी।

बात 2004 में हुए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के वार्षिक सम्मेलन की है। तब संघ के तत्कालीन अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा और महामंत्री पंचानन राय के आमंत्रण पर तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव शहर के एमपी इंटर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित वार्षिक सम्मेलन में शिरकत करने आए थे। इसी सम्मेलन में सीएम मुलायम ने दो बड़ी घोषणाएं कीं। पहली घोषणा, शिक्षकों के सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 कर दिया और दूसरी में मृतक आश्रितों को योग्यता के आधार पर नौकरी की सौगात दे दी।    

        इसके पहले बीएड या एमएड किये पाल्यों को भी चतुर्थ श्रेणी में ही नौकरी मिलती थी। सम्मेलन में ही महामंत्री पंचानन राय ने कहा कि मुख्यमंत्री जी माध्यमिक शिक्षकों को कापियों के मूल्यांकन के बदले सीबीएसई के मुकाबले काफी कम पारिश्रमिक मिलता है। सीएम मुलायम घोषणा के लिए माइक संभालने जा रहे थे, तभी मंच पर मौजूद मुख्य सचिव नीरा यादव ने इशारे में उन्हें रोकने की कोशिश की। लेकिन मुलायम ने शिक्षकों की मांग को अमल में लाने का ऐलान कर दिया। संघ के तत्कालीन जिलाध्यक्ष राम मोहन शाही तब के वाकये को याद कर कहते हैं कि ‘शिक्षकों के लिए वार्षिक सम्मेलन यादगार था। मंच से मुलायम की घोषणा के कुछ दिनों बाद व्यवस्था लागू कर दी गई। शिक्षकों के हित में मुलायम सिंह ने सर्वाधिक फैसले लिये। अब शिक्षकों को पेंशन और ट्रेजरी से समय से वेतन मिल रहा है, यह भी मुलायम सिंह की ही देन है।  

शिक्षामित्रों को डांटा और सब शांत हो गए।

इसी सम्मेलन में बड़ी संख्या में शिक्षा मित्र भी पहुंचे थे। वे पीछे से मानदेय को लेकर हूटिंग कर रहे थे। मुलायम ने इशारों से शांत होने को कहा। इसके बाद भी शोर के बाद नाराज मुलायम ने इन्हें डांट कर शांत रहने को कहा। इस वाकये के गवाह सेवानिवृत प्रघानाचार्य गोरखलाल श्रीवास्तव बताते थे कि मुलायम सिंह की डांट में भी अपनत्व था। उनसे अपनी बात करने या कहने की पूरी छूट थी। बाद में उन्होंने शिक्षा मित्रों के हित में कई काम किये।    
शिक्षक सम्मेलन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक शिक्षिका ने मुलायम को लेकर एक कविता का पाठ किया। जिसे सुनकर मुलायम ने खूब तारीफ की और तत्काल अधिकारियों को शिक्षिका को प्रधानाचार्य के पद पर प्रमोट करने का निर्देश दिया। बाद में शिक्षिका को प्रधानाचार्य बना दिया गया। जिससे शिक्षकों में मुलायम काफी लोकप्रिय हो गए।    

        रुधौली बस्ती से अजय पांडे की रिपोर्ट

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