सेनानी उत्तराधिकारियों ने सरदार पटेल के बताए गए मार्ग पर चलने का लिया संकल्प
बहराइच। स्थानीय सेनानी भवन सभागार में सेनानी उत्तराधिकारियों ने लौहपुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि मनाई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगठन संरक्षक अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा कि उन्हें भारत का लौहपुरूष तथा भारत बिस्मार्क कहा जाता है। वह एक साधारण परिवार में पैदा होने के बावजूद एक मजबूत, अडिग और दृढ़ संकल्पित व्यक्तित्व के धनी थे। वह तत्कालीन कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में एक थे। उन्हें स्वतंत्रता आन्दोलन में वर्षों जेल में रहना पड़ा। संगठन के प्रदेश कार्यवाहक महामंत्री रमेश कुमार मिश्र ने कहा कि सरदार पटेल एक भारतीय अधिवक्ता एवं राजनेता थे। उन्होंने स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत रहकर अग्रणी भूमिका निभाई और एकीकृत स्वतंत्र राष्ट्र में एकीकरण का मार्ग प्रशस्त किया। संगठन के वरिष्ठ सदस्य शिव कुमार कौशल ने कहा कि महात्मा गांधी ने द बारडोली सत्याग्रह में अपने महान संगठनात्मक कौशल के लिए वल्लभ भाई पटेल को सरदार की उपाधि दी। ब्लाक अध्यक्ष बदलूराम गौतम ने कहा कि बिना किसी जंग के उन्होंने 562 रियासतों को भारत में विलय किया। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण हैदराबाद निजाम और जूनागढ़ की रियासत को न चाहते हुए भी भारत संघ में सम्मिलित होना पड़ा। आज गुजरात में उनकी विश्वविख्यात प्रतिमा लगी हुई है जिसे स्टेच्यू ऑफ यूनिटी कहते हैं। अन्त में देश के प्रथम उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए सेनानी उत्तराधिकारियों ने उनके द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में लेखराज, दोस्त मोहम्मद, रंगई यादव, दुःखहरन, अवधराज सिंह, दयाशंकर गिरि सहित तमाम सेनानी उत्तराधिकारी मौजूद रहे।
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