मुकदमा लिखाने का आश्वासन देकर ली गई थी 2000 रुपए की घूस
डीआईजी की जांच में खुलासे के बाद हुए निलंबित, विभागीय जांच स्वीकृत
श्रावस्ती। बहराइच में तैनाती के दरान अपने कारनामों के लिए मशहूर उपनरीक्षक एस एन यादव एक बार फिर घूसखोरी में नप गए हैं । घूस की रकम लेने लेने के बाद पीड़ित द्वारा की गई डीआईजी शिकायत के बाद गोपनीय जांच में रुपए लेने की पुष्टि हुई । जिसके बाद डीआईजी के आदेश पर उप निरीक्षक एस एन यादव को निलंबित कर दिया गया है । वही एक अन्य उप निरीक्षक अंकुर वर्मा को भी निलंबित किया गया है । गौरतलब हो कि जनपद श्रावस्ती अंतर्गत कोतवाली भिनगा के हल्लाजोत निवासी फूलमती पत्नी जगत राम का पड़ोसी से विवाद हुआ था । जिसमें मुकदमा लिखने व विपक्षी के विरुद्ध कार्यवाही के आश्वासन की घुट्टी पिलाकर जेल चौकी प्रभारी उप निरीक्षक एस एन यादव द्वारा पीड़ित से 2000 रुपए की घूस ली गई थी। उसके बाद मुकदमा भी नहीं दर्ज किया गया। इस पर पीड़ित द्वारा डीआईजी के भ्रष्टाचार हेल्पलाइन पर शिकायत की गई थी । शिकायत के बाद डीआईजी द्वारा भ्रष्टाचार के मामले को देखते हुए गोपनीय जांच करायी गयी । जिसमें आरोप सही पाए गए । आरोप सही पाए जाने के बाद श्रावस्ती पुलिस द्वारा भी मामले की जांच की गई । जिसमें भी आरोप सही पाए गए। जिस पर उपनिरीक्षक एस एन यादव को निलंबित कर दिया गया है। वही मामले में विभागीय जांच की संस्कृति कर दी गई है। ज्ञातव्य हो कि यह वही उपनिरीक्षक है जो बहराइच में मटेरा चौकी पर तैनाती के के दौरान घूसखोरी की रकम जेब में रखते हए 11 जनवरी 2020 को वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था । बावजूद इसके तत्कालीन एसपी द्वारा मामले में निलंबन न करते हुए मात्र लाइन हाजिर कर इति श्री कर ली गई। वही बहराइच में तैनाती के दौरान कई अन्य घूसखोरी के मामले भी प्रकाश में आए थे पर कप्तान की मेहरबानी से बच निकले थे। वहीं जनपद गोंडा में भी तैनाती के दौरान दारोगा शेषनाथ यादव का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद तत्कालीन एसपी संतोष कुमार मिश्रा द्वारा उन्हें निलंबित कर दिया गया था। अब सवाल यह है कि घूसखोरी में बार-बार निलंबन के बाद भी दारोगा को सेवा विस्तार दिया जा रहा है । ऐसे दरोगा को जनहित में सेवा से बर्खास्त कर देना चाहिए।


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